Supreme Court Guidelines | Media Reporting Sexual Assault Cases

Supreme Court Guidelines | Media Reporting Sexual Assault Cases

नई दिल्ली4 घंटे पहले

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Supreme Court Guidelines | Media Reporting Sexual Assault Cases

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यौन अपराधों की रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि सनसनीखेज हेडलाइन, यौन हिंसा का ग्राफिक या भड़काऊ जानकारी जनहित में नहीं है। इससे पीड़ितों और उनके परिवारों को गंभीर मानसिक आघात पहुंच सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी गैंगरेप से जुड़े तीन मामलों की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने इन मामलों पर खुद नोटिस लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया संगठनों को POCSO एक्ट की धारा 23 के तहत भी यौन हमले की पीड़ित या नाबालिग बच्चे की पहचान बताने पर रोक है।

पिछले 2 महीनों की इन 3 घटनाओं पर सुनवाई

4 अगस्त को नोएड से दिल्ली जा रही बस में नाबालिग छात्रा से गैंगरेप हुआ था।

4 अगस्त: दिल्ली में 16 साल की नाबालिग से चलती बस में गैंगरेप। पीड़ित ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में बैठी। आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट पर छोड़ा। इस दौरान बस करीब 47 किमी दौड़ती रही। बस के शीशों पर पर्दे लगे थे।

12 सितंबर: स्वरूप नगर में 16 साल की नाबालिग से गैंगरेप-हत्या। अगले दिन खेत के पास खुले मैदान में शव मिला। चार आरोपी गिरफ्तार हुए, जिनमें तीन नाबालिग हैं।

21 सितंबर: दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग अपने दोस्त के साथ बैठी थी। तीन युवकों ने फर्जी पुलिस वाले बनकर छात्रा से रेप किया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

कलेक्टर मीडिया संस्थानों के साथ बैठक करें

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि जिला प्रशासन को मीडिया संस्थानों के साथ तुरंत बैठक करनी चाहिए। अखबारों में एक अलग कॉलम और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अलग समय तय किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे भरोसा है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस जिम्मेदारी को निभाएगा। मीडिया संस्थान ऐसे नंबरों के लिए बिना शुल्क यानी प्रो बोनो अलग कॉलम या समय उपलब्ध कराएंगे।

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