Supreme Court on Liquor Ban

Supreme Court on Liquor Ban

12 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
Supreme Court on Liquor Ban

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शराबबंदी से शराब की लत और जहरीली शराब से होने वाली मौतें खत्म नहीं होतीं। कोर्ट ने कहा कि जबरन शराबबंदी, शराब की समस्या का समाधान नहीं है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि गुजरात में दशकों से शराबबंदी लागू है, लेकिन जहरीली शराब से हो रही मौतें नहीं रुकीं। मेथनॉल मिली शराब से 10 बड़े हादसों में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।

सुप्रीम कोर्ट 18 सितंबर को महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स, 1972 के नियम 18A और 18B रद्द करने का फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की।

इन नियमों के तहत मेथनॉल खरीदने और रखने को नियंत्रित किया गया था। गैर-दवा निर्माताओं को बिक्री से पहले मेथनॉल में रंग और कड़वा पदार्थ मिलाना जरूरी था।

कोर्ट ने भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश की हालिया घटनाओं का भी जिक्र किया। इनमें करीब 13 और 15 लोगों की मौत हुई थी।

सख्ती से शराब का कारोबार अंडरग्राउंड होता है

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शराब पर पूरी तरह रोक लगाने से शराब का कारोबार अंडरग्राउंड हो जाता है। इससे जहरीली शराब का चलन बढ़ता है।

फैसले में कहा गया, “भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश में हाल में हुई जहरीली शराब की घटनाएं अधिकारियों को फिर से जागने और कार्रवाई करने की याद दिलाती हैं।”

महाराष्ट्र के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स के नियम 18A और 18B को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इन नियमों के तहत मेथनॉल खरीदने पर रोक लगाई गई थी। गैर-दवा निर्माता को मेथनॉल बेचने से पहले उसमें कड़वा पदार्थ और रंग मिलाना भी जरूरी किया गया था।

ये नियम 1991 में मुंबई के छाया बार से खरीदी गई नकली शराब पीने के बाद हुई मौतों के बाद लागू किए गए थे। कुल 250 लोगों ने यह शराब पी थी, जिनमें से 93 की मौत हो गई थी। बाद में पता चला था कि इन लोगों ने मेथनॉल पीया था। मेथनॉल जहर से कम खतरनाक नहीं होता।

कोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक और मनमाना बताया। कोर्ट ने कहा कि इनसे उद्योगों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा। ये नियम उन मूल समस्याओं का समाधान नहीं करते, जिनसे जहरीली शराब की घटनाएं होती हैं। इनमें मेथनॉल की चोरी, उसका गलत जगह पहुंचना और भ्रष्टाचार शामिल हैं।

अवैध शराब की सप्लाई रोकने के निर्देश

  • बेंच ने सरकारों को कई निर्देश जारी किए। इनमें शराब की सप्लाई और मांग की कड़ी तोड़ने की जरूरत बताई गई। कोर्ट ने अवैध तरीके से शराब ले जाने पर रोक के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने को भी कहा।
  • कोर्ट ने कहा कि नगर निगम के कई स्कूल परिसर खुले मैदान होते हैं। इनका इस्तेमाल अक्सर अवैध शराब रखने के लिए किया जाता है।
  • कोर्ट ने सरकारों को केमिकल सॉल्वेंट बनाने वाली औद्योगिक इकाइयों की निगरानी की सलाह दी। ऐसी इकाइयां इन सॉल्वेंट को अवैध रूप से शराब बनाने वालों को बेचती हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेथनॉल की ढुलाई अलग टैंकरों या कंटेनरों में की जानी चाहिए। इससे मेथनॉल की चोरी या उसकी जगह दूसरा पदार्थ भरने की संभावना खत्म होगी।

————————–

सुप्रीम कोर्ट की यह खबर भी पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट की सलाह- युवा वकील सीनियर्स से ट्रेनिंग लें: उनके बिना पेशे की बारीकियां नहीं जान सकते, कोर्ट में क्या नहीं बोलना यह भी सीखेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने 18 सितंबर को कोर्ट रूम में मौजूद युवा वकीलों से कहा कि सीनियरों के साथ ट्रेनिंग के बिना वे पेशे की बारीकियां नहीं सीख पाएंगे। युवा वकीलों को यह पता होना चाहिए कि कोर्ट में क्या बोलना है और क्या नहीं।

ये बातें जस्टिस बीवी नागरत्ना और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने ये टिप्पणियां बॉम्बे हाईकोर्ट के एक आदेश से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कुछ युवा बिना ट्रेनिंग सीधे अपना काम शुरू कर रहे हैं। यह बिल्कुल सही नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…

Source link
#Supreme #Court #Liquor #Ban

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *