नई दिल्ली18 मिनट पहले
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AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन शुक्रवार को कड़कड़डूमा कोर्ट पहुंचे थे। सजा के बाद कोर्ट से बाहर जाते हुए।
2020 के दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
कोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर वारदात थी, जिसने समाज को झकझोर दिया। कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण, दंगा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का दोषी ठहराया था। वहीं, 11 आरोपियों में से 6 को बरी कर दिया गया था।
लोकल कोर्ट ने कहा –
ताहिर हुसैन हथियारों से लैस उस भीड़ का हिस्सा थे, जो हिंदुओं के प्रति नफरत के कारण दंगा, आगजनी और लूटपाट करने के लिए इकट्ठा हुई थी। जिसने बेरहमी से और लगातार हमला करके शर्मा की हत्या कर दी।

पुलिस ने मौत की सजा मांगी थी
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा था, ‘आरोपियों ने सारी हदें पार कर दीं। अंकित की मौत होने के बाद भी उन पर हमला जारी रखा गया। यह बेहद क्रूर और सुनियोजित हत्या थी। इसलिए दोषियों को फांसी की सजा दी जाए।
ताहिर के वकील ने कहा- रेयरेस्ट ऑफ रेयर का मामला नहीं
ताहिर हुसैन के वकील ने दलील दी थी कि हर हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती। किसी भी दोषी की अलग-अलग भूमिका साफ नहीं बताई गई। इसलिए यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता।
हिंसाग्रस्त इलाके के नाले में मिला था अंकित शर्मा का शव

IB अफसर अंकित शर्मा की 25 फरवरी, 2020 को हत्या की गई थी।
दिल्ली दंगा 23 फरवरी, 2020 से शुरू हुआ था। 25 फरवरी को आईबी अफसर अंकित शर्मा घर से बाहर निकले थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं आए। परिवार उनकी तलाश कर रहा था, तभी लोगों ने बताया कि उनका शव चांदबाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में देखा गया है।
अगले दिन सुबह पुलिस ने नाले से अंकित का शव बरामद किया था। इसके बाद पिता रविंदर कुमार की शिकायत दयालपुर थाने में केस दर्ज किया गया था।
उनका आरोप था कि अंकित की हत्या तत्कालीन AAP पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने की है। शिकायत के अनुसार, आरोपी ताहिर हुसैन के ऑफिस में इकट्ठा हुए थे और हत्या के बाद अंकित के शव को नाले में फेंक दिया गया।

नाले में पड़ा अंकित का शव, उनके शरीर पर 51 जख्म थे।
CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुआ था दंगा
23 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी और समर्थक आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से पथराव होने लगे थे।
26 फरवरी तक चले दंगों में 53 लोगों की जान गई थी। 250 से ज्यादा जख्मी हो गए थे। मरने वालों में 38 मुसलमान और 15 हिंदू थे। करीब 800 दुकानें जला दी गई थीं। 500 से ज्यादा घरों को आग के हवाले कर दिया गया था।
भास्कर नॉलेज…
ताहिर ने पैरोल पर जेल से बाहर आकर लड़ा था 2025 का विधानसभा चुनाव

फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में ताहिर हुसैन ने मुस्तफाबाद सीट से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने जीत दर्ज की थी, जबकि ताहिर हुसैन तीसरे नंबर पर रहे थे। उन्हें करीब 33 हजार वोट मिले थे। चुनाव प्रचार के लिए ताहिर कस्टडी पैरोल पर बाहर आए थे।
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