भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 703.04 अंक टूटकर 75,688.35 पर आ गया, जो 0.92 फीसदी का नुकसान है। निफ्टी भी 203.25 अंक गिरकर 23,666.35 पर आ गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 15 पैसे बढ़कर 96.58 पर पहुंच गया।
निवेशकों की धारणा कमजोर बनी रही। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफ.आई.आई.) की लगातार बिकवाली जारी रही। सावधानी भरे वैश्विक संकेतों ने बाजार पर दबाव डाला। बाजार को कंपनियों के तिमाही परिणामों से भी कोई खास मदद नहीं मिली। विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में घरेलू शेयर बाजारों पर भारी पड़ेंगी।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण क्या रहे?
बाजार पर दबाव के कई प्रमुख कारण रहे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव की आशंका बढ़ी। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार अपनी हिस्सेदारी बेची, जिससे पूंजी का बहिर्प्रवाह हुआ। कमजोर वैश्विक धारणा ने भी निवेशकों के आत्मविश्वास को प्रभावित किया। इन सभी नकारात्मक कारकों ने कंपनियों की जारी आय तिमाही के सकारात्मक प्रभाव को कम कर दिया।
वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन कैसा रहा?
वैश्विक बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का टोपीक्स 1 फीसदी नीचे गिर गया। ऑस्ट्रेलिया का एस. एंड पी./ए.एस.एक्स. 200 भी 0.9 फीसदी गिरा। हांगकांग का हैंग सेंग 1.3 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 1 फीसदी नीचे आया। टोक्यो समय अनुसार सुबह 11:53 बजे तक एस. एंड पी. 500 फ्यूचर में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर भी अपरिवर्तित रहे।