इमेज स्रोत, WANA/REUTERS
समाचार एजेंसी ने 12 जून को कहा कि युद्ध समाप्त करने से जुड़े किसी भी मेमोरेंडम (एमओयू) का अंतिम मसौदा तब तक जारी नहीं किया जाएगा, जब तक दोनों पक्ष औपचारिक रूप से उसे मंजूरी नहीं दे देते.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देश समझौते के क़रीब हैं. इस पर दस्तख़त होते ही होर्मुज़ स्ट्रेट फिर खोल दिया जाएगा.
12 जून को ही समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक पश्चिमी सूत्र के हवाले से ख़बर दी कि जिनेवा में रविवार तक इस मेमोरेंडम पर दस्तख़त हो सकते हैं. हालांकि मेमोरेंडम की भाषा को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
एक दिन पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा था कि ईरान अभी किसी समझौते को लेकर अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचा है.
ईरानी संस्थाओं की ओर से इस समझौते की समीक्षा पूरी होने के बाद ही कोई ऐलान किया जाएगा.
आईआरएनए ने समझौते का पूरा मसौदा प्रकाशित नहीं किया है लेकिन कहा है कि हाल के दिनों में सर्कुलेट किए गए कई दस्तावेज़ों को गलत तरीके से “फ़ाइनल मसौदा” बताया गया है.
एजेंसी के मुताबिक़, कुछ लीक दस्तावेज़ों में मौजूदा मसौदे के सिद्धांतों का ज़िक्र है लेकिन वे आधिकारिक नहीं हैं.
अर्द्ध सरकारी मेहर न्यूज़ एजेंसी ने इससे पहले एक सूत्र के हवाले से 14 बिंदुओं वाले मेमोरेंडम मसौदे का ब्योरा छापा था.
इसमें सभी मोर्चों पर युद्धविराम, लेबनान में संघर्ष समाप्त करने, 30 दिनों के भीतर ईरानी व्यवस्था के तहत होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान की फ़्रीज़ संपत्तियों को रिलीज़ करने जैसी शर्तें थीं.
इसके अलावा 60 दिनों तक सिर्फ़ परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और युद्ध के बाद मुआवज़े और री-कंस्ट्रक्शन पर बातचीत जैसी शर्तें भी शामिल हैं.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम का क्या होगा?
इमेज स्रोत, Getty Images
आईआरएनए के मुताबिक़ प्रस्तावित समझौता दो चरणों में होगा.
पहले चरण में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त किया जाएगा. इसके बाद 60 दिनों तक केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध से हुए नुक़सान के मुआवज़े पर बातचीत होगी.
आईआरएनए ने कहा कि शुरुआती मेमोरेंडम में ईरान कोई नई परमाणु प्रतिबद्धता मंज़ूर नहीं करेगा. अगर समझौते पर दस्तख़त होते हैं तो भी ईरान का “शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम” पहले की तरह बरकरार रहेगा.
एजेंसी के मुताबिक़ बाद की बातचीत भी ईरान के मूल सिद्धांतों के दायरे में होंगी, जिनमें यूरेनियम एनरिचमेंट का अधिकार और एनरिच्ड मैटेरियल को अपने पास रखने का अधिकार शामिल है.
हालांकि यह रुख़ इसराइल की मांगों से मेल नहीं खाता. इसराइल का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते में एनरिच्ड यूरेनियम को हटाना और यूरेनियम एनरिचमेंट के स्ट्रक्चर को ख़त्म करना जैसी शर्तें शामिल होंगी.
साथ ही मिसाइल प्रोडक्शन को सीमित करना और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को ईरानी समर्थन समाप्त करने जैसी बातें शामिल होनी चाहिए.
होर्मुज़ स्ट्रेट और लेबनान का मुद्दा क्यों अहम है?
इमेज स्रोत, Hwawon Ceci Lee/Anadolu via Getty Images
होर्मुज़ स्ट्रेट इस बातचीत का एक अहम मुद्दा है. आईआरएनए ने उन दावों को ख़ारिज किया कि ईरान इस जलमार्ग का नियंत्रण किसी और को सौंप देगा या युद्ध से पहले की व्यवस्था बहाल करेगा.
एजेंसी के मुताबिक़ मसौदे में सिर्फ़ युद्ध के बाद समुद्री यातायात को सामान्य बनाने और तटीय देशों की ओर से सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात की गई है.
ईरान के मुताबिक़ इसमें अमेरिका की ओर से लगाए गए ‘गैरक़ानूनी अवरोधों’ और व्यापारिक जहाज़ों को दी जा रही धमकियों को समाप्त करने की बात कही गई है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने को संभावित समझौते की बड़ी उपलब्धि बताया है.
एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने यह भी कहा कि समझौते के तहत तेल संबंधी प्रतिबंध हटाए जाएंगे.
ईरान की अरबों डॉलर की फ़्रीज संपत्ति रिलीज़ की जाएंगी और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष रोकना होगा.
आईआरएनए ने ये भी कहा कि मसौदे में लेबनान का साफ़ ज़िक्र है. इसमें केवल युद्धविराम को आगे बढ़ाने की नहीं बल्कि युद्ध समाप्त करने की बात की गई है.
समझौते के रास्ते की अड़चनें
इमेज स्रोत, Getty Images
समझौते को लेकर विस्तृत रिपोर्टों के बावजूद ईरान अभी भी सतर्क रुख़ अपनाए हुए है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने अमेरिका पर बार-बार अपना रुख़ बदलने और नई “अतार्किक” मांगें रखने का आरोप लगाया है.
वहीं आईआरएनए का कहना है कि अंतिम मसौदे को अभी भी ईरान की निर्णय लेने वाली संस्थाओं की मंज़ूरी चाहिए.
सरकारी एजेंसी ने यह भी कहा कि संभावित समझौते की समीक्षा अमेरिका को लेकर “पूरी तरह संदेह” के माहौल में की जा रही है.
समझौते पर दस्तख़त होने का मतलब यह नहीं होगा कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा हो गया है या वह अपनी सैन्य तैयारी कम कर देगा.
इसके अलावा बाहरी चुनौतियां भी हैं. अमेरिका की ओर से अभी तक ईरानी सूत्रों की ओर से मसौदे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि इसराइल पहले ही कह चुका है कि वो इस मेमोरेंडम में पक्ष नहीं है.
दस्तख़त हो जाने की स्थिति में भी यह समझौता राजनीतिक और व्यावहारिक रूप से नाज़ुक बना रह सकता है.
ईरान इस मसौदे को युद्ध की ऐसी समाप्ति के तौर पर पेश कर रहा है जो उसकी ‘सीमारेखाओं’ की सुरक्षा करता है. साथ ही ये सबसे मुश्किल परमाणु मुद्दों को बाद की बातचीत के लिए टाल देता है.
दूसरी ओर, ट्रंप इसे लगभग अंतिम समझौता बता रहे हैं, जो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगा और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोल देगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
Source link
#अमरक #स #जलद #समझत #हन #क #उममद #क #बच #ईरन #न #कस #एक #समरख #तय #कर #द #ह


