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जैन धर्म के महान तपस्वी संयम, सत्य और अहिंसा के प्रतीक, आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य आचार्य 108 समय सागर महाराज का बुधवार सुबह नर्मदापुरम शहर में आगमन हुआ। रसूलिया डबल फाटक पर आचार्य श्री के साथ 20 पिच्छी मुनिराजों का शहर में मंगल प्रवेश हुआ। जहां सकल जैन समाज और शहरवासियों ने आचार्य श्री का स्वागत किया। दर्शन कर आशीर्वाद लिया। उनके स्वागत में जगह-जगह टेंट, बैंड-बाजे और रंगोलियां बनाकर शहर को सजाया गया। आचार्य श्री रसूलिया, भोपाल तिराहा, एनएमवी तिराहा, सतरस्ते होते हुए बड़े दिगंबर जैन मंदिर, मंगलवारा पहुंचे। यहां आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन, पूजन-अर्चना के बाद प्रवचन हुए। जिसमें उन्होंने अहिंसा की सीख दी। भारत से हो रहे मांस निर्यात पर चिंता जताई। प्रवचन की मुख्य बातें सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष संतोष जैन ने बताया आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज का नर्मदापुरम आगमन नगर के इतिहास में एक अविस्मरणीय एवं स्वर्णिम अध्याय रहेगा। नगर प्रवेश यात्रा में नगर के जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी, व्यापारी वर्ग, सकल जैन समाज के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य, विद्यासागर पाठशाला के छात्र-छात्राएँ, विभिन्न जैन महिला मंडल, युवा संगठन, नगर के अनेक सामाजिक एवं हिन्दू संगठन ने सदस्यों ने श्रद्धापूर्वक सम्मिलित होकर आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया। शाम को आचार्य श्री बुधनी के लिए रवाना हो गए।
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