आज राजनाथ-कोइजुमी वार्ता: चीन की चेतावनी के बीच बढ़ेगी भारत-जापान साझेदारी, ड्रैगन असहज – India Japan Defence Ties Rajnath Singh Shinjirō Koizum Talk China Keeping Eyes On Strategic Collaboration

आज राजनाथ-कोइजुमी वार्ता: चीन की चेतावनी के बीच बढ़ेगी भारत-जापान साझेदारी, ड्रैगन असहज – India Japan Defence Ties Rajnath Singh Shinjirō Koizum Talk China Keeping Eyes On Strategic Collaboration

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके जापानी समकक्ष शिंजिरो कोइज़ुमी के बीच आज अहम द्विपक्षीय वार्ता होगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस का उद्देश्य रक्षा संबंध मजबूत करना, रणनीतिक भरोसा बढ़ाना, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना और भविष्य के रक्षा सहयोग का रोडमैप तैयार करना है। बैठक में मेक इन-इंडिया फ्रेमवर्क के तहत रक्षा प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में सहयोग पर विशेष जोर रहेगा।

जापानी रक्षा मंत्री ने बुधवार को मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा किया और स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस चेन्नई का निरीक्षण भी किया।साथ ही नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन से मुलाकात की। जापानी दल को नौसेना की क्षमताओं के बारे में जानकारी दी गई।

बीजिंग की बेचैनी

जुलाई में दोनों देशों के बीच हुए शिखर सम्मेलन के बाद चीन ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने वाला नहीं होना चाहिए। ऐसे छोटे व विशिष्ट गुट नहीं बनाए जाने चाहिए जो क्षेत्रीय विभाजन को बढ़ाएं। इसके कुछ सप्ताह बाद ही कोइज़ुमी भारत पहुंचे हैं। दरअसल भारत और जापान रक्षा सहयोग के साथ ही दुर्लभ खनिजों, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर भी सहयोग कर रहे हैं। दोनों देशों ने पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर चिंता जताते हुए बलपूर्वक स्थिति बदलने के प्रयासों का भी विरोध किया है। चीन जानता है कि रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा और दुर्लभ खनिजों में बढ़ता भारत-जापान सहयोग उसके सामरिक प्रभाव को चुनौती देने की क्षमता रखता है। दोनों देशों की बढ़ती साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के सामरिक प्रभाव को कड़ी चुनौती दे सकती है, जिससे बीजिंग की बेचैनी लगातार बढ़ रही है।

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ऐसे बढ़ेगी साझेदारी

भारत और जापान औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं बना रहे हैं, लेकिन साथ मिलकर रक्षा तकनीक विकसित कर रहे हैं। समुद्री निगरानी व सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं। साथ ही आपूर्ति शृंखलाओं में चीन पर निर्भरता भी घटा रहे हैं। यही बदलाव इस साझेदारी को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। जापान के पास उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, संचार और जहाज निर्माण की विशेषज्ञता है, जबकि भारत के पास बड़ा रक्षा बाजार, बढ़ती उत्पादन क्षमता और हिंद महासागर में अहम भौगोलिक स्थिति है। राजनाथ-कोइज़ुमी वार्ता यह तय करेगी कि यह निकटता कितनी जल्दी ठोस रक्षा परियोजनाओं में तब्दील होती है।

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