इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को हाई कोर्ट का झटका, मुआवजा न लेने वाले किसानों की जमीन के कब्जे पर लगाई रोक

इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को हाई कोर्ट का झटका, मुआवजा न लेने वाले किसानों की जमीन के कब्जे पर लगाई रोक

हाई कोर्ट की एकलपीठ ने व्यवस्था दी है कि जिन किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है, उनकी जमीनों का कब्जा फिलहाल नहीं लिया जा सकेगा। …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 19 May 2026 08:37:45 PM (IST)Updated Date: Tue, 19 May 2026 08:37:45 PM (IST)

इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को हाई कोर्ट का झटका, मुआवजा न लेने वाले किसानों की जमीन के कब्जे पर लगाई रोक
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कारिडोर को झटका। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. ग्रीनफील्ड कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण पर कानूनी पेंच
  2. किसानों की जमीन अधिग्रहण पर भी लागू होगा स्टे
  3. गांव के किसानों की याचिका पर हाई कोर्ट हुआ सख्त

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर, उज्जैन के बीच प्रस्तावित ग्रीन फील्ड कारिडोर प्रोजेक्ट को हाई कोर्ट से झटका लगा है। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने व्यवस्था दी है कि जिन किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है, उनकी जमीनों का कब्जा फिलहाल नहीं लिया जा सकेगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन किसानों ने मुआवजा ले भी लिया है और वे मुआवजा लौटाते हैं तो उनकी जमीन अधिग्रहण पर स्टे लागू हो जाएगा।

सागवाल के किसानों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

एडवोकेट पूनम महाजन ने बताया कि शासन ने इंदौर से उज्जैन के बीच 48.1 किमी फोरलेन सड़क की योजना तैयार की है। इसे ग्रीन फील्ड कारिडोर नाम दिया गया है। यह सड़क पितृ-पर्वत से शुरू होकर सीधे चिंतामण गणेश मंदिर के पास उज्जैन बायपास तक बनना है।

दावा किया जा रहा है कि इस सड़क से इंदौर और उज्जैन के बीच की दूरी 30 मिनट में पूरी हो जाएगी। योजना के तहत इंदौर जिले की हातोद तहसील में आने वाले ग्राम सागवाल की 16.496 हेक्टेयर जमीन भी अधिग्रहित की कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन अधिग्रहण के विरुद्ध नाराज किसानों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

कानूनी गड़बड़ी और महाधिवक्ता के वादे के उल्लंघन का आरोप

आरोप है कि जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कानूनी रूप से गलत है। जमीन अधिग्रहण के लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है, उसमें केवल एक ग्रुप की राय को ही जारी किया गया है, जबकि नोटिफिकेशन में रिपोर्ट की समरी को नोटिफिकेशन में दिया जाना था। इसके साथ ही अन्य कई कानूनी गड़बड़ियां भी हैं।

याचिका प्रस्तुत होने के बाद महाधिवक्ता ने 13 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट में कहा था कि शासन भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कानून के सभी प्रावधानों का पालन करेगी। इन प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। इसके बावजूद किसानों की जमीनों को अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इसकी फोटो सहित जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी और कार्रवाई रोकने की मांग की थी।

मुआबजा लौटाने पर भी प्रभावी होगा स्टे

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कहा कि याचिका दायर करने वाले किसानों के मामले में जो भी कार्रवाई की जाएगी, वह कानून के अनुसार ही की जाएगी। कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि याचिका दायर करने वाले कुछ किसान पहले ही मुआवजा ले चुके हैं और कुछ मुआवजा लेने को तैयार भी हैं। कोर्ट ने माना कि चूंकि याचिकाओं पर सुनवाई जारी है और इस बीच जमीनों का कब्जा ले लिया जाता है तो याचिकाओं का कोई मतलब नहीं रहेगा।

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इसके चलते जिन्होंने मुआवजा नहीं लिया है उनकी जमीनों की स्थिति यथावत रखी जाए और जिन्होंने मुआवजा ले लिया है वे अगर याचिका जारी रखना चाहते हैं तो जिस दिनांक को वे पैसा वापस करेंगे, उस दिनांक से उनकी जमीन पर स्टे रहेगा। अगर कोई मुआवजा लेने के लिए तैयार है तो वह इसके लिए स्वतंत्र है। ऐसी स्थिति में शासन निर्धारित कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए स्वतंत्र रहेगा।

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