इंदौर की महिला मैकेनिक्स ने आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से केवल 32 हजार रुपये में ‘यंत्रिका ई-साइकिल’ तैयार की है। …और पढ़ें

HighLights
- समान सोसायटी प्रशिक्षित महिलाओं ने एक माह की मेहनत से बनाई तकनीकी ई-साइकिल
- शुरुआती तकनीकी चुनौतियों को पार कर 25 किमी रेंज वाली साइकिल को किया तैयार
- बल्क कच्चा माल मंगाकर घटाएंगे लागत, कम कीमत में ग्राहकों को उपलब्ध कराएंगे साइकिल
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पर्यावरण संरक्षण के लिए इन दिनों इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में एक अभिनव पहल शहर में हुई है। एक ऐसी पहल जिसमें तकनीक का समावेश, पर्यावरण का हित, रोजगार की संभावना और महिला सशक्तीकरण का संदेश भी शामिल है। शहर की महिलाओं ने इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई है।
यह साइकिल आईआईटी बांबे की मदद से बनाई है जिसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक से लैस साइकिल समाज के उस वर्ग तक पहुंचाना है जो इलेक्ट्रिक साइकिल की कीमत ज्यादा होने के कारण उसे चला नहीं पाते। शहर में यह पहल महिला मैकेनिक गैराज यंत्रिका सर्विस सेंटर की महिलाओं ने की है। साइकिल बनाने वाली ये वे महिलाएं हैं जिन्हें समान सोसायटी द्वारा मैकेनिक के रूप में प्रशिक्षित किया गया था।
आईआईटी के छात्रों ने की मदद
यह इलेक्ट्रिक साइकिल एक बार चार्ज होने पर लगभग 25 किलोमीटर तक चल सकती है और इसकी अधिकतम गति 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस साइकिल का नाम यंत्रिका ई-साइकिल रखा गया है। इसे शिवानी रघुवंशी, सपना जाधव, शिवांगी बंसल और दिव्या गोहिल ने बनाया है।
साइकिल बनाने के शुरुआती चरण में आईआईटी बांबे की मदद ली गई थी, जिसके चलते वहां के विद्यार्थी इंदौर आए थे और इन महिलाओं की मदद की। हालांकि शुरुआत में कई तकनीकी चुनौतियां भी सामने आई और साइकिल कम दूरी ही तय कर पा रही थी। इसके बाद करीब एक माह की मेहनत में महिलाओं ने साइकिल बना ली।
कम लागत में उपलब्ध करवाई जाएगी साइकिल
समान सोसायटी के डायरेक्टर राजेंद्र बंधु के अनुसार इस साइकिल को बनाने में करीब 32 हजार रुपये की लागत आई है, लेकिन इसकी कीमत काफी कम रखी जाएगी ताकि लोग इसे आसानी से खरीद सकें। चूंकि आगे कच्चा माल बल्क में बुलवाया जाएगा, जिससे लागत कम होगी और हम आसानी से कम कीमत में साइकिल उपलब्ध करवा पाएंगे। यह कदम पर्यावरण हित में सहायक होगा।
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