
ऐसा नहीं कि तेल के भाव ज्यादा हो और अन्य जीवनोपयोगी सामग्री यथा शकर, आटा, तुअर दाल, चावल के भाव में कमी हो बल्कि यह सभी बढ़ चुके हैं। तेल व्यवसायी अशोक अग्रवाल के अनुसार सामान्यतया 14 तारीख तक बाजार में तेजी का दौर रहता है यह वह मौका होता है जब सेलरीज कस्टमर अपनी जरूरत की सामग्री लेता है। 15 के बाद भाव में कमी आने लगती है। लेकिन इस बार तिलहन के अनुमान उम्मीद से नीचे रहे जिसके कारण खाद्य तेल महंगे बिक रहे हैं।
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