इंदौर से जल्द ही सार्वजनिक परिवहन के नए और आधुनिक दौर की शुरुआत होगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत छह रूटों पर 26 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किय …और पढ़ें

HighLights
- AI सुरक्षा से लैस होंगी इंदौर की ई-बसें
- रियल टाइम ट्रैकिंग के लिए पैनिक बटन
- GPS और सीसीटीवी से होगी मॉनिटरिंग
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर से जल्द ही सार्वजनिक परिवहन के नए और आधुनिक दौर की शुरुआत होगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत छह रूटों पर 26 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इसके लिए एआईसीटीसीएल द्वारा टेंडर जारी किए गए हैं। अनुबंध के तहत इन बसों को जुलाई माह से शुरू होने वाली नई बस सेवा में शामिल किया जाएगा। यह पहल यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर के अलावा शहर में हरित और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी मजबूती प्रदान करेगी।
टेंडर प्रक्रिया और अनुबंध की शर्तें
राज्य सरकार जुलाई में इंदौर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों का संचालन शुरू कर रही है। पहले चरण में अनुबंध के आधार पर 12 मीटर इलेक्ट्रिक इंजन वाली 26 बसें चलाने की योजना है। इसके लिए 22 जून तक टेंडर बुलाए गए हैं। तीन वर्ष बस संचालन का अनुभव रखने वाले ऑपरेटर इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। ऑपरेटर के लिए 10 करोड़ का टर्नओवर होना जरूरी है।
एक या तीन ऑपरेटर एक साथ भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। 23 जून को तकनीकी बिड खोली जाएगी। इसमें सफल रहने पर ऑपरेटर और एआईसीटीसीएल के बीच दस साल बस संचालन का अनुबंध होगा। बाद में अनुबंध को दो वर्ष आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकेगा। चयनित ऑपरेटरों को नई इलेक्ट्रिक बस उपलब्ध करानी होगी। ऑपरेटरों को इलेक्ट्रिक बस संचालन के लिए बस डिपो के अलावा रूट पर और अंतिम पड़ाव पर चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था करनी होगी।
सरकार की तरफ से 40 प्रतिशत अनुदान
अनुबंध करने वाले ऑपरेटर को नई इलेक्ट्रिक बस खरीदने पर सरकार की तरफ से बस की कीमत या 1.50 करोड़, जो भी कम हो, का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। यह अनुदान चार चरणों में मिलेगा। रूट प्लानिंग, सर्विस स्टैंडर्ड्स और ऑपरेशनल मॉनिटरिंग एआईसीटीसीएल करेगा। वहीं बस ऑपरेटर को सुरक्षित और कस्टमर-ओरिएंटेड सर्विस देनी होगी।
सुरक्षा व्यवस्था और रियल टाइम ट्रैकिंग
बसों में एआईएस-140 मानकों के अनुरूप जीपीएस आधारित व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगाई जाएगी। यह सिस्टम सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़ा रहेगा, जिससे बसों की लोकेशन और संचालन की निगरानी रियल टाइम में होगी। हर बस में पैनिक बटन भी लगाए जाएंगे। बस में दो सीसीटीवी कैमरों से पूरे यात्री क्षेत्र और ड्राइवर के केबिन की रिकॉर्डिंग होगी। ड्राइवर के केबिन में 7 इंच की डिस्प्ले स्क्रीन लगाई जाएगी, जिससे पीछे की गतिविधियां देखी जा सकें।
बस ऑपरेटरों के सामने चुनौतियां
नई बस उपलब्ध कराना चुनौती है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि अनुबंध के लिए नई बसें मांगी जा रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों की कीमत 1.25 करोड़ रुपये के करीब है। ऐसे में 40 प्रतिशत अनुदान मिलने के बावजूद भी शेष राशि ऑपरेटरों को चुकानी होगी।
बसों का संचालन एआईसीटीसीएल के चयनित रूटों पर होगा। अधिकांश रूटों पर पहले से बसें चल रही हैं। वहीं लागत और रखरखाव ऑपरेटरों के जिम्मे रहेगा, इससे लागत निकालना मुश्किल होगा। अनुभव और वित्तीय आधार भी बाधा बन रहे हैं।
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ऑपरेटरों पर रहेगा जुर्माने का प्रावधान
- बस ट्रैकिंग नहीं होने पर एक हजार रुपये जुर्माना
- समय पालन नहीं करने पर 500 रुपये प्रतिदिन जुर्माना
- पहला हादसा होने पर 15 हजार जुर्माना और वैधानिक जिम्मेदारियां भी
- बस उपलब्ध नहीं होने पर एक हजार रुपये प्रति बस प्रतिदिन जुर्माना
- इलेक्ट्रिक चार्जिंग उपलब्ध नहीं होने पर एक हजार प्रतिदिन जुर्माना
- चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिलने पर 500 रुपये जुर्माना
- एक हजार ट्रिप पर दो से अधिक शिकायतें आने पर हर अतिरिक्त शिकायत पर 500 रुपये जुर्माना
| प्रस्तावित रूट (Proposed Routes) | आवंटित बसों की संख्या (Number of Buses) |
| इंदौर — भोपाल | 8 |
| इंदौर — उज्जैन | 6 |
| इंदौर — खंडवा | 4 |
| इंदौर — खरगोन | 4 |
| इंदौर — मांडव | 2 |
| इंदौर — सेंधवा | 2 |
| कुल बसें (Total Fleet) | 26 |
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