इंदौर बना स्टार्टअप हब, लेकिन शुरुआती फंडिंग की कमी अब भी बनी हुई है चुनौती

इंदौर बना स्टार्टअप हब, लेकिन शुरुआती फंडिंग की कमी अब भी बनी हुई है चुनौती

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : देश के प्रमुख उभरते स्टार्टअप शहरों में शामिल हो चुके इंदौर के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नए स्टार्टअप शुरू करना नहीं, बल्कि उन्हें शुरुआती निवेश उपलब्ध कराना है। आईआईटी इंदौर, एसजीएसआईटीएस, डीएवीवी सहित अन्य इनक्यूबेशन सेंटर ने शहर में स्टार्टअप का मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया है। हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा तकनीक आधारित कंपनियां शुरू कर रहे हैं, लेकिन प्री-सीड और सीड स्टेज पर पूंजी की कमी उनके स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में चुनौती बनी हुई है।

विशेषज्ञों की माने तो इंदौर में आइडिया और टैलेंट की कमी नहीं है, लेकिन स्थानीय निवेशकों के सीमित नेटवर्क के कारण कई स्टार्टअप शुरुआती दौर में ही धीमे पड़ जाते हैं या फिर निवेश की तलाश में बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों का रुख करते हैं। इंदौर में 1300 से अधिक रिजस्टर्ड स्टार्टअप मौजूद है, जाे आइटी, हेल्थटेक, एग्रीटेक, फिनटेक, और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। लेकिन इन स्टार्टअप के सामने सबसे बड़ी समस्या फंडिंग गैप की है।

रहती हैं ये चुनौतियां

विशेषज्ञ पुलकित श्रीवास्तव के अनुसार, किसी भी स्टार्टअप के लिए शुरुआती 10 से 25 लाख रुपये तक की पूंजी जुटाना सबसे कठिन होता है। इसी चरण में कमर्शियल प्रोडक्ट डेवलप करना, टीम तैयार करना, मार्केटिंग कर ग्राहकों तक पहुंच बनाना होता है। हालांकि, बैंक कई बार लोन देने से बचती हैं। वहीं, बड़े वेंचर कैपिटल फंड तभी निवेश करते हैं जब कंपनी अपने बिजनेस माडल को बाजार में साबित कर चुकी हो या उसमें भविष्य में बड़ा बिजनेस माडल बनने की संभावना हो। लिहाजा कई स्टार्टअप फंडिंग से वंचित रह जाते हैं।

मेट्रो सिटी की तरफ ज्यादा रूख

भारत में स्टार्टअप निवेश का अधिकांश हिस्सा अब भी कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित है। आइटी एक्सपर्ट अंशुल गायकवाड़ के अनुसार, इंदौर में कई फंडिंग ग्रुप, वेंचर कैपटलिस्ट निवेश करते हैं, लेकिन कुल निवेश का बड़ा हिस्सा बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों तक सीमित रहता है।

इन शहरों में एंजेल निवेशकों, वेंचर कैपिटल फंड, एक्सेलरेटर और बड़े कारपोरेट का मजबूत नेटवर्क मौजूद है। इसके विपरीत इंदौर जैसे उभरते शहरों में अच्छी गुणवत्ता वाले स्टार्टअप होने के बावजूद निवेशकों की स्थानीय उपलब्धता सीमित है। यही कारण है कि अधिकांश संस्थापकों को निवेशकों के सामने प्रेजेंटेशन देने के लिए बार-बार दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है।

बाजार तक पहुंच उपलब्ध करवाना होगी

आइटी एक्सपर्ट विजित सिंह के अनुसार, इंदौर में इनक्यूबेशन और मेंटरशिप की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। इनक्यूबेशन फाउंडर्स को तकनीकी मार्गदर्शन, बिजनेस माडल तैयार करने और नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही फंडिंग से जुड़े कई प्रोग्राम भी शुरू करते हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। इंदौर में स्टार्टअप पिचिंग प्रोग्राम और एंजेल नेटवर्क की संख्या बढ़ानी होगी। साथ ही फंड आफ फंड्स, को-इन्वेस्टमेंट माडल और स्थानीय एंजेल नेटवर्क को प्रोत्साहन जैसी पहल को और मजबूत किया जा सकता है।

कॉलेज स्तर पर हों प्रयास

विशेषज्ञों के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग भी बढ़ाना होगा। हर वर्ष छात्र नई तकनीक और उत्पाद विकसित करते हैं, लेकिन अधिकांश आइडिया लैब तक ही सीमित रह जाते हैं। यदि कॉलेज स्तर पर सीड फंड, प्रोटोटाइप अनुदान और इंडस्ट्री पार्टनरशिप को मजबूत किया जाए तो इन नवाचारों को व्यावसायिक उत्पादों में बदला जा सकता है। इसके साथ ही स्थानीय बड़े उद्योग और उद्योगपति ही इन स्टार्टअप में निवेश करें तो भी इन स्टार्टअप को गति मिल सकती है।

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