नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की प्रयोगशालाओं में हर साल कई नई स्वास्थ्य तकनीकें और मेडिकल डिवाइस विकसित होते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे नवाचारों की होती है जो शुरुआती परीक्षण या प्रोटोटाइप के स्तर तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन उसके बाद उन्हें कमर्शियल प्रोडक्ट में बदलना आसान नहीं होता।
पर्याप्त वित्तीय सहायता, उद्योग से जुड़ाव, तकनीकी परीक्षण और व्यावसायिक मार्गदर्शन की कमी के कारण कई उपयोगी तकनीकें प्रयोगशाला तक ही सीमित रह जाती हैं। इसका असर यह होता है कि मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने वाले कई समाधान आम लोगों तक नहीं पहुंच पाते। इसी अंतर को दूर करने और एकेडमिक रिसर्च को प्रोडक्ट बदलने के उद्देश्य से आईआईटी इंदौर की दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन ने नई पहल की है।
इस पहल के अंतर्गत दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन ने लैब टू मार्केट प्रोग्राम शुरू किया है। इस पहल का लक्ष्य ऐसे मेडिकल डिवाइस और डिजिटल हेल्थकेयर नवाचारों को आगे बढ़ाना है जिनमें समाज की जरूरतों को पूरा करने और बाजार में सफल होने की अच्छी संभावना है। कार्यक्रम के जरिए शोधकर्ताओं को आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी, कानूनी और व्यावसायिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि प्रयोगशाला में तैयार तकनीकें अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और आम लोगों तक पहुंच सकें। यह उन तकनीकों के लिए तैयार किया गया है जो प्रूफ आफ कंसेप्ट या प्रोटोटाइप के स्तर तक पहुंच चुकी हैं और जिनमें व्यावसायिक उपयोग और सामाजिक लाभ की अच्छी संभावना है।
1.5 करोड़ रुपये तक की मिलेगी आर्थिक सहायता
दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन के टेक्निकल आफिसर वैभव जैन के अनुसार, कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित परियोजनाओं को उनकी जरूरत और व्यावसायिक क्षमता के आधार पर अधिकतम 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। कार्यक्रम के तहत शोधकर्ताओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिलेगी, बल्कि तकनीक को बेहतर बनाने, प्रोडक्ट डेवलपमेंट करने, रियल कंडिशन में टेस्ट करने में भी विशेषज्ञों का सहयोग मिलेगा। इसके साथ ही इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी राइट्स, पेटेंट फाइल करने, तकनीक के लाइसेंस और स्टार्टअप से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
इस पर रहेगा फोकस
एलटूएम कार्यक्रम का मुख्य फोकस आधुनिक डिजिटल हेल्थकेयर तकनीकों पर रहेगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मेडिकल डिवाइस, स्मार्ट हेल्थकेयर सिस्टम, एम्बेडेड हेल्थकेयर इलेक्ट्रानिक्स, वेयरेबल बायोसेंसर, स्मार्ट पैच, लगातार स्वास्थ्य निगरानी करने वाले उपकरण, पोर्टेबल मानिटरिंग सिस्टम और मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े जुटाने वाली तकनीकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा कार्डियक, सांस और मेटाबॉलिक निगरानी तकनीक, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली, बुजुर्गों और घर पर इलाज कराने वाले मरीजों के लिए निगरानी उपकरण, फिजियोलाजिकल सिग्नल एक्विजिशन सिस्टम, पाइंट-आफ-केयर डायग्नोस्टिक तकनीक, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक डिवाइस, बायोसेंसर आधारित जांच प्रणाली और कम लागत वाले डायग्नोस्टिक समाधान तकनीकों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
इस दिशा में भी होगा कार्य
- प्रोडक्ट डेवलपमेंट
- टेक्नोलाजी टेस्टिंग
- फील्ड वैलिडेशन
- आईपीआर से जुड़ा सहयोग
स्टार्टअप बदल रहे इंदौर शहर की तस्वीर, ट्रैफिक, स्वास्थ्य और पर्यावरण की चुनौतियों का मिल रहा समाधान
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