कोर्ट ने शिक्षक द्वारा डीएनए टेस्ट से इंकार करने को उसके विरुद्ध अनुमान लगाते हुए न सिर्फ कुटुंब न्यायालय के आदेश को पलटा बल्कि महिला और उसके बच्चे को …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। डीएनए टेस्ट से इनकार करना एक शासकीय शिक्षक को भारी पड़ा। कोर्ट ने शिक्षक द्वारा डीएनए टेस्ट से इनकार करने को उसके विरुद्ध अनुमान लगाते हुए न सिर्फ कुटुंब न्यायालय के आदेश को पलटा बल्कि महिला और उसके बच्चे को 12 वर्ष पहले से पांच-पार्ट हजार रुपए भरण पोषण देने का आदेश दे दिया।
महिला ने स्वयं और नाबालिग बेटे की ओर से हाई कोर्ट में अपील प्रस्तुत की थी। उसने दावा किया था कि उसका विवाह शासकीय शिक्षक से हुआ था और इससे उसे एक बेटा भी है। कुछ समय बाद उसे और उसके बच्चे को ससुराल से निकाल दिया गया था।
शिक्षक का दावा- महिला केवल कामगार थी, चोरी करने पर निकाला
जिसे महिला अपना पति बता रही थी उस शिक्षक ने विवाह और उसके बच्चे का पिता होने से ही इंकार कर दिया था। उसका कहना था कि महिला उसके यहां काम करती थी, लेकिन उसने चोरी की थी इसलिए उसे निकाल दिया था। अधीनस्थ न्यायालय ने महिला के विरुद्ध फैसला सुनाया था। इस पर महिला ने हाई कोर्ट में अपील प्रस्तुत की।
डीएनए टेस्ट से शिक्षक के इनकार को कोर्ट ने माना उसके विरुद्ध प्रमाण
उसने आवेदन लगाया कि शासकीय शिक्षक उसके बेटे के पिता है या नहीं यह सिद्ध करने के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाए, लेकिन शिक्षक ने इससे इंकार कर दिया। कोर्ट ने अपील का निराकरण करते हुए कहा कि यदि महिला केवल घरेलू कामगार थी, तो शिक्षक यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसका विवाह किससे हुआ था और बच्चे का पिता कौन है।
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