रेलवे ने सिंहस्थ के बाद इसे तोड़कर नया फ्लायओवर बनाने का निर्णय लिया है। यह 18 मीटर चौड़ा होगा। सिंहस्थ के बाद ही यार्ड रीमॉडलिंग का कार्य होगा। ऐसे म…और पढ़ें

HighLights
- रेलवे द्वारा बनाए जाने वाले शास्त्री ब्रिज का निमार्ण यदि अभी शुरू होता तो सिंहस्थ के पहले नहीं पूरा हो पाता
- ऐसे में सिंहस्थ में इंदौर व उज्जैन वाले लोगों के कारण इस ब्रिज के न होने से शहर के अलग-अलग मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव बढता
- यही वजह है कि रेलवे ने सिंहस्थ के बाद इसे तोड़कर नया फ्लायओवर बनाने का निर्णय लिया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रेलवे द्वारा बनाए जाने वाले शास्त्री ब्रिज का निमार्ण यदि अभी शुरू होता तो सिंहस्थ के पहले नहीं पूरा हो पाता। ऐसे में सिंहस्थ में इंदौर व उज्जैन वाले लोगों के कारण इस ब्रिज के न होने से शहर के अलग-अलग मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव बढता।
यही वजह है कि रेलवे ने सिंहस्थ के बाद इसे तोड़कर नया फ्लायओवर बनाने का निर्णय लिया है। यह 18 मीटर चौड़ा होगा। सिंहस्थ के बाद ही यार्ड रीमॉडलिंग का कार्य होगा। ऐसे में अतिरिक्त प्लेटफॉर्म व अतिरिक्त रेल लाइन बिछाने का कार्य भी उसी समय शुरु होगा।
ये बातें पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामाश्रय पांडे ने गुरुवार को इंदौर रेलवे स्टेशन पर प्रेसवर्ता के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 में यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इस पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। पटेल ब्रिज के समीप पार्सल कार्यालय को तोड़कर जो भवन निर्माण चल रहा है। उसका पूरा निर्माण कार्य होने के बाद उस भवन का उपयोग पार्सल कार्यालय के रूप में न करते हुए सिंहस्थ के दौरान यात्रियों की सुविधाओं के लिए किया जाएगा। सिंहस्थ के बाद ही मुख्य रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण का काम शुरू होगा। इसे 2030 तक पूरा किया जाएगा।
टीही टनल का कार्य 15 जुलाई तक पूरा होगा
महाप्रबंधक रामाश्रय पांडे व रतलाम मंडल के डीआरएम अश्विनी कुमार के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री, धार विधायक नीना वर्मा ने गुरुवार को इंदौर धार रेलवे लाइन पर बन रही टीही टनल का निरीक्षण किया है। पांडे ने बताया इस टनल का 135 मीटर काम बचा हुआ है, जो 15 जुलाई तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद बैलास्टिक ट्रैक बिछाने का काम अगस्त तक पूरा किया जाएगा। सितंबर तक टनल का काम पूरा हो जाएगा तो उसके बाद इसका उदघाटन हो सकेगा।
प्रदेश की सबसे बड़ी है टीही रेल टनल

- दो हजार 957 मीटर की है लंबाई, 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हुआ।
- 131 मीटर की लाइन (पटरी) डालने का कार्य है शेष।
- इसमें मेट्रो की तरह बैलास्ट लेस ट्रैक बनाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह सीमेंट कांक्रीट का होगा।
- 1216 मीटर में बैलास्टलेस ट्रैक डालने का कार्य हो चुका है।
महू-ओंकारेश्वर गेज परिवर्तन का भी किया निरीक्षण
गुरुवार सुबह महाप्रबंधक ने डॉ. अंबेडकर नगर (महू)-ओंकारेश्वर रेलखंड के गेज परिवर्तन कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन भवन, प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया, विद्युतीकरण कार्य व सिग्नलिंग प्रणाली को देखा और अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नर्मदा नदी पर निर्माणाधीन रेल पुल का निरीक्षण भी किया।
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