इंदौर में 64 लाख में खरीदी जमीन, 11 साल बाद भी नहीं मिला कब्जा, करार के बावजूद नहीं किया विकास

इंदौर में 64 लाख में खरीदी जमीन, 11 साल बाद भी नहीं मिला कब्जा, करार के बावजूद नहीं किया विकास

बड़ियाकीमा क्षेत्र में विकसित की जा रही प्रस्तावित कॉलोनी की जमीन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब जांच के घेरे में है। मुंबई के कारोबारी महावीर…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 08:21:31 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 08:21:31 AM (IST)

इंदौर में 64 लाख में खरीदी जमीन, 11 साल बाद भी नहीं मिला कब्जा, करार के बावजूद नहीं किया विकास
खरीदी जमीन पर 11 साल बाद भी नहीं मिला कब्जा। (एआई इमेज)

HighLights

  1. बड़ियाकीमा क्षेत्र में विकसित की जा रही प्रस्तावित कॉलोनी की जमीन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद जांच के घेरे में है
  2. जमीन का सौदा करने के बाद तय शर्तों के मुताबिक कॉलोनी विकसित नहीं करने और कब्जा नहीं देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है
  3. दस्तावेज के मुताबिक मामला ग्राम बड़ियाकीमा स्थित करीब 8.511 हेक्टेयर जमीन का विवाद है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : बड़ियाकीमा क्षेत्र में विकसित की जा रही प्रस्तावित कॉलोनी की जमीन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब जांच के घेरे में है।

मुंबई के कारोबारी महावीर वर्मा की शिकायत में भूमाफिया संजीव लुंकड़ और स्नेहा लुंकड़ पर जमीन का सौदा करने के बाद तय शर्तों के मुताबिक कॉलोनी विकसित नहीं करने और कब्जा नहीं देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। आरोपित पार्थ क्रेडिट एंड कैपिटल मार्केट प्रा. लि. का डायरेक्टर है।

कनाड़िया टीआई डा.सहर्ष यादव के अनुसार दस्तावेज के मुताबिक मामला ग्राम बड़ियाकीमा स्थित करीब 8.511 हेक्टेयर जमीन का विवाद है। राजेश्वरी एवेन्यु सिद्धेश्वर सीएचसी लिमिटेड जयराज नगर वेस्ट मुंबई निवासी महावीर पुत्र रामस्वरुप वर्मा ने शिकायत में बताया गया है कि प्रस्तावित कॉलोनी प्रस्ती हिल्स के भूखंड क्रमांक 34, कुल क्षेत्रफल 10,454 वर्गफीट, के लिए 30 अगस्त 2012 से 29 जून 2015 के बीच विभिन्न माध्यमों से करीब 64.10 लाख रुपये दिए गए। इसके बाद 29 मई 2015 को रजिस्ट्री कराई गई।

आरोपित ने प्रस्तावित कॉलोनी विकसित करने के बाद आवेदक को कब्जा देने की शर्त का उल्लेख था। आरोप है कि कालोनी विकसित नहीं की गई और भूखंड का कब्जा भी अब तक नहीं दिया गया।

जमीन का एक हिस्सा कंपनी को भी बेचा गया था

जांच के दस्तावेज में एक और महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया है। वर्ष 2005-06 में संबंधित जमीन खरीदी गई थी। इसमें से करीब 2.65 हेक्टेयर यानी 6.54 एकड़ जमीन वर्ष 2008 में आइडियल इलेक्ट्रानिक्स प्रा.लि. को 35 लाख रुपये में पंजीकृत सेल एग्रीमेंट के जरिए बेचने का उल्लेख है। हालांकि दस्तावेज के मुताबिक उस समय कंपनी को कब्जा नहीं दिया गया था और रजिस्ट्री भी नहीं हुई थी। टीआई के अनुसार आरोपित के विरुद्ध पूर्व में भी धोखाधड़ी के प्रकरण दर्ज हो चुके है।

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