इंदौर हाई कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब- बगैर योजना के उज्जैन के मंदिरों की विकास पर काम कैसे शुरू कर रहे

इंदौर हाई कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब- बगैर योजना के उज्जैन के मंदिरों की विकास पर काम कैसे शुरू कर रहे

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बांड जारी करने की योजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में शुक्रवार को सुनवाई ह…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 11:14:56 AM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 11:14:56 AM (IST)

इंदौर हाई कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब- बगैर योजना के उज्जैन के मंदिरों की विकास पर काम कैसे शुरू कर रहे
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अंगारेश्वर, मंगलनाथ और कालभैरव मंदिरों के लिए प्रस्तावित 300 करोड़ की योजना को चुनौती देते हुए दायर हुई है जनहित याचिका
  2. अंगारेश्वर महादेव मंदिर शिप्रा नदी के तट के निकट स्थित है और उसका क्षेत्र मास्टर प्लान के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है
  3. उज्जैन नगर निगम ने उज्जैन के तीनों प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं नवनिर्माण के लिए टेंडर जारी किए हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बांड जारी करने की योजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने शासन, उज्जैन नगर निगम, उज्जैन विकास प्राधिकरण, ठेकेदार फर्म मे. एमके इंजीनियरिंग ग्रुप को नोटिस जारी कर पूछा है कि बगैर योजना उज्जैन के मंदिरों के विकास पर काम कैसे शुरू किया जा रहा है। जवाब चार सप्ताह में देना होगा।

याचिका प्रभात मोहन पांडे ने एडवोकेट रोहित शर्मा के माध्यम से प्रस्तुत की है। एडवोकेट शर्मा के मुताबिक हमने कोर्ट को बताया कि उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) और उज्जैन नगर निगम ने उज्जैन के तीनों प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं नवनिर्माण के लिए टेंडर जारी किए हैं। इस परियोजना के लिए आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां ही नहीं ली गई हैं। इस परियोजना की लागत करीब 300 करोड़ रुपये बताई गई, लेकिन इतनी राशि न तो यूडीए के पास है न ही उज्जैन नगर निगम के पास।

यूडीए का कहना है कि बांड जारी कर धन जुटाया जाएगा, लेकिन बांड जारी करने के लिए जो स्वीकृतियां ली जाना जरूरी हैं वे भी नहीं ली गई हैं। इन प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जमीन का भी अब तक अधिग्रहण नहीं हुआ है। याचिका में कहा है कि योजना में विकास कार्य जिस स्थान पर प्रस्तावित किए गए हैं, उसमें अंगारेश्वर महादेव मंदिर शिप्रा नदी के तट के निकट स्थित है और उसका क्षेत्र मास्टर प्लान के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है।

बगैर पर्याप्त योजना, संसाधन और अनुमतियों के कार्य शुरू करने से धार्मिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका भी है। इससे उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को परेशान होना पडेगा। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि उक्त प्रस्तावित निर्माण कार्य समय पर पूरे नहीं हुए तो सिंहस्थ के दौरान आने वाले भक्तों को परेशानी भी आ सकती है। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। अगली सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में होगी।

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