उत्तर कोरिया यात्रा के दौरान किम जोंग-उन के साथ शी जिनपिंग के मतभेद कहां दिखे

उत्तर कोरिया यात्रा के दौरान किम जोंग-उन के साथ शी जिनपिंग के मतभेद कहां दिखे

चीन के राष्ट्रपति दो दिन के दौरे पर उत्तर कोरिया गए थे

इमेज स्रोत, EPA/Shutterstock

इमेज कैप्शन, चीन के राष्ट्रपति दो दिन के दौरे पर उत्तर कोरिया गए थे

    • Author, कोह ईवे

    • Author, लौरा बिकर
    • पदनाम, चीन संवाददाता
  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का प्योंगयांग का दो दिनों का दौरा ख़त्म हो गया है. साल 2019 के बाद पहली बार शी जिनपिंग नॉर्थ कोरिया पहुंचे थे.

बीते सोमवार को शी उत्तर कोरिया पहुंचे थे और रेड कार्पेट से लेकर एक्रोबैटिक परफॉर्मेंस तक हर जगह उनके स्वागत में किम जोंग-उन ख़ुद तैनात थे.

सरकारी समाचार आउटलेट केसीएनए की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यात्रा के दौरान कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया, हालांकि इसके महत्व को किम ने मान्यता दी. उन्होंने कहा कि साल की अपनी पहली राजकीय यात्रा के लिए शी का प्योंगयांग को चुनना द्विपक्षीय संबंधों पर “अत्यधिक महत्व” को दर्शाता है.

चीनी नेता के इस दौरे को इस नज़रिए से भी देखा जा रहा है कि वो उत्तर कोरिया जैसे अपने रणनीतिक साथी के साथ रिश्तों को नए सिरे से शुरू करना चाह रहे हैं जिसने हाल के दिनों में रूस से क़रीबी बढ़ाई है.

इस दौरे के साथ राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया को ये भी याद दिलाया है कि उसका प्रमुख साथी चीन ही है.

शी जिनपिंग के दौरे को चीन के सरकारी अख़बारों ने प्रमुखता से कवर किया

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, शी जिनपिंग के दौरे को चीन के सरकारी अख़बारों ने प्रमुखता से कवर किया

वहीं किम जोंग-उन को भी इस बात का एहसास होगा कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की मेज़बानी करने वाले चीनी नेता उनके घर आए हैं तो इतने प्रतिबंध लगने के बाद भी उनके साथ एक महत्वपूर्ण दोस्त खड़ा है.

सोमवार शाम को हुए एक समारोह में शी जिनपिंग ने चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों की अहमियत का ज़िक्र किया. चीन की सरकारी मीडिया शिन्हुआ के मुताबिक शी जिनपिंग ने ये भी कहा कि चीन और उत्तर कोरिया “पहाड़ों और नदियों से जुड़े हुए हैं और दोनों की मंज़िल भी एक ही है.”

किम ने भी इस बात से सहमति जताई और कहा नॉर्थ कोरिया चीन के साथ अपनी दोस्ती को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखता है. किम ने चीन के ‘वन चाइना’ नीति को भी समर्थन दिया.

किम जोंग-उन ने कहा कि ये दौरा “अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आ रहे उतार-चढ़ाव” वाले दौर के बीच दोनों देशों के बीच मज़बूत दोस्ती को दिखाता है.

वहीं शी ने कहा कि उन्होंने किम के साथ “समय की नब्ज़ को टटोलने” और उच्च-स्तरीय बातचीत के साथ-साथ लोगों के बीच आपसी संबंधों को मज़बूत करने के लिए एक “महत्वपूर्ण सहमति” बनाई है.

चीन और उत्तर कोरिया के रक्षा समझौते के 65 साल

शी जिनपिंग और किम जोंग-उन हाथ मिलाते हुए. दोनों ने सूट पहने हुए हैं. उनके पीछे चीनी और उत्तर कोरियाई झंडों की एक पंक्ति है.

इमेज स्रोत, KCNA

इमेज कैप्शन, शी जिनपिंग का किम जोंग-उन ने अपनी दो दिवसीय प्योंगयांग यात्रा के दौरान भव्य स्वागत किया.

दोनों नेताओं ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि इस साल चीन और उत्तर कोरिया के बीच रक्षा समझौते की 65वीं वर्षगांठ है. यह चीन का किसी भी देश के साथ एकमात्र रक्षा समझौता है.

चीन, उत्तर कोरिया का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक साझेदार है और परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर उस पर लगाए गए भारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उसके लिए एक जीवनरेखा की तरह है.

लेकिन उत्तर कोरिया की चीन पर निर्भरता और गठबंधन में जूनियर पार्टनर होने के बावजूद, इस हफ़्ते किम कम से कम एक अहम मुद्दे पर अपनी बात मनवाने में कामयाब रहे.

बीते सोमवार की बातचीत के बारे में सरकारी मीडिया की रिपोर्टों में उत्तर कोरिया के परमाणु-निरस्त्रीकरण यानी कि डीन्यूक्लराज़ेशन के बारे में कोई चर्चा नहीं थी. हालाँकि यह कोई हैरानी की बात नहीं है.

हाल के सालों में चीन ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु-मुक्त करने की अपनी मांग को काफ़ी कम कर दिया है और सार्वजनिक रूप से इसका ज़िक्र करने से भी बचता रहा है.

इस यात्रा के दौरान शी के साथ उनकी सरकार के कुछ सबसे महत्वपूर्ण लोग भी आए थे, जिनमें उनके चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ काई ची, रक्षा मंत्री डोंग जून, विदेश मंत्री वांग यी और वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओ शामिल थे.

मंगलवार को, दोनों नेताओं ने फ्रेंडशिप टॉवर का दौरा किया, जो कोरियाई युद्ध में लड़ने वाले चीनी सैनिकों की याद में बनाया गया है.

शिन्हुआ ने बताया कि वे प्योंगयांग के शीर्ष कैडर स्कूल भी गए, जहां उन्होंने अपनी सदाबहार दोस्ती के प्रतीक के रूप में एक देवदार का पेड़ लगाया.

प्योंगयांग में अपनी यात्रा के दौरान, शी कुम्सुसन स्टेट गेस्ट हाउस में रुके, जो प्योंगयांग के बीचों-बीच स्थित एक ख़ास गेस्ट हाउस है.

ख़बरों के मुताबिक़, साल 2019 में शी की प्योंगयांग की पहली राजकीय यात्रा के स्वागत के लिए बनाए गए इस गेस्ट हाउस में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको जैसे विदेशी नेता भी ठहर चुके हैं.

जब मतभेद भी नज़र आए

शी जिनपिंग और किम जोंग-उन (दाएं) एक पेड़ को पानी देते हैं

इमेज स्रोत, Xinhua

इमेज कैप्शन, शी और किम ने एक देवदार का पेड़ लगाया, जो उनकी सदाबहार दोस्ती का प्रतीक था.

हालांकि, इतने भव्य सार्वजनिक प्रदर्शनों के बावजूद चीन और उत्तर कोरिया के बीच के सभी मतभेदों को छिपाया नहीं जा सका.

अपने भाषण में, शी ने उम्मीद जताई कि यह यात्रा “दोनों देशों के समाजवादी मक़सद के लिए संयुक्त रूप से एक उज्ज्वल भविष्य का रास्ता खोलेगी” जो चीन के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है.

बीजिंग लंबे समय से उत्तर कोरिया को चीन के अपने कम्युनिस्ट नेतृत्व वाले मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है, जिसमें बाज़ार, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार करते हुए एक दलीय शासन बनाए रखना शामिल है.

अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्तों के एक्सपर्ट सिडनी सेइलर ने एक्स पर लिखा, “चीनी रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति शी शायद निराश हो सकते हैं.”

उन्होंने कहा कि किम डेवलपमेंट की किसी प्रक्रिया का ज़िक्र नहीं करते और “उत्तर कोरिया अभी भी चीन के विकास के अनुभव से सीखने से इनकार करता है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

Source link
#उततर #करय #यतर #क #दरन #कम #जगउन #क #सथ #श #जनपग #क #मतभद #कह #दख

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *