उद्धव ठाकरे हुए भावुक, पार्टी प्रमुख से इस्तीफ़े की पेशकश कर पूछे ये सवाल

उद्धव ठाकरे हुए भावुक, पार्टी प्रमुख से इस्तीफ़े की पेशकश कर पूछे ये सवाल

उद्धव ठाकरे

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इमेज कैप्शन, शिवसेना (यूबीटी) में टूट की ख़बरों के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पद छोड़ने की पेशकश की है

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महाराष्ट्र में शुक्रवार को शिव सेना का 60वां का स्थापना दिवस समारोह पार्टी के दोनों धड़ों के बीच ज़ुबानी जंग का अखाड़ा बन गया.

उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी शिव सेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने के संकेतों के बीच भावुक अपील करते दिखे तो वहीं शिव सेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनकी पार्टी ही बाला साहेब ठाकरे की पार्टी की असली वारिस है.

उद्धव ठाकरे ने शिव सेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़े की पेशकश की.

उन्होंने कहा कि अगर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि पार्टी छोड़कर गए सांसदों की ओर से उन पर लगाए गए आरोप सही हैं तो वो पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं.

उन्होंने शिव सेना के ‘ऑपरेशन टाइगर’ को गंदी राजनीति क़रार दिया और उन आरोपों का भी खंडन किया कि शिव सेना (यूबीटी) कांग्रेस में विलय करने जा रही है.

एकनाथ शिंदे की शिव सेना ने उद्धव ठाकरे की शिव सेना को अपने पाले में लाने कोशिश को कथित तौर पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया है.

शिव सेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिव सेना में जाने की ख़बरें हैं. पार्टी के संसदीय दल की बैठक में ये छह सांसद नहीं पहुँचे थे.

शिव सेना की स्थापना उद्धव ठाकरे के पिता बाला साहेब ठाकरे ने की थी और टाइगर इसका प्रतीक चिह्न है.

उद्धव ठाकरे ने क्या कहा

उद्धव ठाकरे

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इमेज कैप्शन, उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की वो आरोप लगाने वालों को जवाब दें

शिव सेना (यूबीटी) के नौ में से छह सांसदों के बारे में ख़बर है कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर संसद में अलग बिठाने की मांग की है.

शुक्रवार को मुंबई षण्मुखानंद हॉल में शिवसेना के 60 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ‘पार्टी में टूट’ को लेकर काफ़ी भावुक दिखे.

इस कार्यक्रम में नेता, कार्यकर्ता और पार्टी के सिर्फ़ तीन सांसद मौजूद थे.

कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने शिव सेना की ओर पार्टी के छह सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके ख़िलाफ़ लगाए जा रहे आरोपों पर विश्वास है तो वो पार्टी प्रमुख नहीं रहेंगे.

उन्होंने कहा, “पिछले 12-13 साल से मैं एक नेता के तौर पर आप लोगों की सुन रहा हूँ. लेकिन अगर आपको लगता है कि जो आरोप मुझ पर लगाए जा रहे हैं वो सच है तो मैं पार्टी प्रमुख से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हूँ. लेकिन मेरे लिए एक चीज़ साफ़ है कि सोने की शिव सेना चोरों के हाथों नहीं सौंपी जानी चाहिए. मेरे अंदर नेता की बनने की लालसा नहीं है. मैं इस पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हूँ.”

उन्होंने कहा, ”पार्टी बदलने वाले सांसद ये आरोप लगा रहे हैं कि मैं उपलब्ध नहीं रहता हूँ और सांसदों को समय नहीं देता. ये सारे आरोप मुझ पर लगाए जा रहे हैं. आप बताइए, क्या आप इन पर विश्वास करते हैं? अगर हाँ, तो मैं इसी वक़्त पद छोड़ने को तैयार हँ. आप में से कोई एक आगे आए, मैं अभी उसे पार्टी सौंपने को तैयार हूँ. आरोप लगाने वालों को जवाब आप दीजिए मैं भागने वालों में नहीं हूँ. मैं मज़बूती से खड़ा रहूंगा, लेकिन मुझे आपका साथ चाहिए.”

उद्धव ठाकरे

बीजेपी और शिव सेना की ओर से ठाकरे परिवार पर लगाए जा रहे आरोपों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसी ने यह नहीं देखा कि उनके परिवार ने वर्षों तक कितनी कठिनाइयों का सामना किया है.

उन्होंने कहा उनका परिवार कभी सत्ता से मोह रखने वाला नहीं रहा. 2019 में परिस्थितियों की वजह से उन्हें मुख्यमंत्री का पद संभालना पड़ा था.

उन्होंने कहा, ”देश की राजनीति जिस दिशा में जा रही है, उससे लोगों का लोकतंत्र में भरोसा कम हो रहा है. यह लोकतंत्र के लिए ख़तरा है. जिस दिशा में हम बढ़ रहे हैं, वह अराजकता की ओर ले जा रही है.”

उन्होंने पार्टी बदलने वाले सांसदों पर तंज़ कसते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने 30 साल तक बीजेपी के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद उसमें विलय नहीं किया. जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं, वे कहते हैं कि उन्हें डर था कि हम कांग्रेस में विलय कर लेंगे.”

ठाकरे ने कहा, “बीजेपी ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से आगे बढ़कर ‘वन नेशन, नो इलेक्शन’ की ओर बढ़ रही है.”

उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर ‘गंदी राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस जेन ज़ी को “कॉकरोच” कहा जा रहा है, वही देश में बदलाव लाएगी.

उन्होंने पश्चिम बंगाल में ढाई लाख अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती का ज़िक्र करते हुए कहा कि एक महिला को हराने के लिए इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को भेजा गया.

उन्होंने चुनौती दी कि इतनी ही संख्या में जवान मणिपुर या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में तैनात किए जाएं.

‘असली वारिस हमारे शिव सैनिक’

एकनाथ शिंदे

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इमेज कैप्शन, एकनाथ शिंदे का कहना है कि शिवसेना की विरासत की दावेदार उन्हीं की पार्टी

उधर, मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ग्राउंड में आयोजित शिव सेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिव सेना नेता एकनाथ शिंदे ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम लिए बगैर संकेत दिया कि और भी नेता पार्टी बदल सकते हैं.

उन्होंने कहा, “अब तक जो दिखा है, वह सिर्फ़ ट्रेलर है, पूरी फ़िल्म अभी बाकी है.”

शिंदे ने कहा, “बालासाहेब ठाकरे के असली वारिस मेरे शिव सैनिक हैं. उत्तराधिकार ख़ून के रिश्तों से नहीं, विचारधारा से तय होता है. शिव सेना कोई ज़मीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की विचारधारा है.”

एकनाथ शिंदे ने 2022 में उद्धव ठाकरे से अलग होकर बीजेपी के साथ जाने के अपने फ़ैसले का भी बचाव किया.

उन्होंने कहा, ”मेरे विरोधियों ने भविष्यवाणी की थी कि मेरा करियर ख़त्म हो जाएगा. मुझे गांव लौटकर खेती करनी पड़ेगी. लेकिन मेरी शिव सेना ने महाराष्ट्र विधानसभा में अपनी ताक़त बढ़ाई है.”

अपने पूरे भाषण में शिंदे ने उस अहम सवाल का जवाब देने की कोशिश की, जो शिव सेना के विभाजन के बाद से लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है.

आख़िर बाल ठाकरे की असली राजनीतिक विरासत का प्रतिनिधित्व कौन करता है.

शिव सेना में टूट

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इमेज कैप्शन, उद्धव ठाकरे के पिता बालासाहेब ठाकरे (बाएं) ने 1966 में शिवसेना की स्थापना की थी

बाला साहेब ठाकरे ने 1966 में शिव सेना की स्थापना की थी. पहली बार पार्टी ने 1990 में बीजेपी के साथ महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव लड़ा और 52 सीटों पर जीत हासिल की.

पार्टी में को 1991 टूट का सामना करना पड़ा था, जब छगन भुजबल पार्टी के 18 विधायकों को साथ लेकर कांग्रेस में चले गए थे.

पहली बार महाराष्ट्र में बीजेपी-शिव सेना की गठबंधन की सरकार 1995 में बनी और मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने थे.

पार्टी को बड़ा झटका 2022 में लगा जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी का एक धड़े ने बग़ावत कर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी की सरकार गिरा दी. शिंदे खुद मुख्यमंत्री बन गए.

फरवरी 2023 में पार्टी के ज़्यादातर विधायकों के शिंदे के साथ चले जाने की वजह से चुनाव आयोग ने इसे असली शिव सेना की मान्यता दे दी.

पार्टी चुनाव चिह्न तीर-धनुष भी इसे मिल गया. वहीं शिवसेना (यूबीटी) को मशाल चुनाव चिह्न मिला.

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिव सेना (यूबीटी) लगातार कमज़ोर होती दिखी. फ़रवरी 2026 में बीएमसी चुनावों में भी पार्टी हार गई . बीएमसी पर पिछले कई सालों से शिव सेना (यूबीटी) का दबदबा था.

इस महीने शिव सेना (यूबीटी) को एक और झटका लगा जब पार्टी के छह सांसदों ने बगावत कर शिंदे की शिव सेना में जाने के संकेत दिए.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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