एक समय था, जब देहरी पूजन करके लौट आते थे हिंदू, भोजशाला के संघर्ष की गाथा

एक समय था, जब देहरी पूजन करके लौट आते थे हिंदू, भोजशाला के संघर्ष की गाथा

वर्ष में एक बार वसंत पंचमी पर सुबह से शाम तक विशेष पूजा की अनुमति भी दी गई। इसी आदेश के तहत मुस्लिम समाज को प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे तक न …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 16 May 2026 12:27:13 AM (IST)Updated Date: Sat, 16 May 2026 12:31:36 AM (IST)

एक समय था, जब देहरी पूजन करके लौट आते थे हिंदू, भोजशाला के संघर्ष की गाथा
धार भोजशाला।

HighLights

  1. संस्कृति मंत्री भावना चिखलिया ने 8 अप्रैल 2003 से हिंदू समाज को हर मंगलवार पूजा की अनुमति दी।
  2. इसके साथ ही वर्ष में एक बार वसंत पंचमी पर सुबह से शाम तक विशेष पूजा की अनुमति भी दी गई।
  3. मुस्लिम समाज को प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति मिली।

नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। भोजशाला को लेकर वर्षों तक चले विवाद और आंदोलन ने कई महत्वपूर्ण मोड़ देखे। दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हिंदू समाज को भोजशाला में प्रवेश और पूजा पर पूर्ण प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था। उस दौरान श्रद्धालु केवल देहरी पूजन कर लौट जाते थे।

इसी अवधि में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी भोजशाला पहुंचीं, लेकिन वह भी देहरी पूजन कर लौट गई थीं। इसके बाद वर्ष 2003 में भोजशाला को लेकर व्यापक आंदोलन खड़ा हुआ।

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आंदोलन के दबाव और लगातार उठती मांगों के बीच तत्कालीन केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उस समय की केंद्रीय संस्कृति मंत्री भावना बहन चिखलिया ने आदेश जारी करते हुए 8 अप्रैल 2003 से हिंदू समाज को प्रत्येक मंगलवार पूजा-अर्चना की अनुमति प्रदान की।

इसके साथ ही वर्ष में एक बार वसंत पंचमी पर सुबह से शाम तक विशेष पूजा की अनुमति भी दी गई। इसी आदेश के तहत मुस्लिम समाज को प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।

बाकी पांच दिनों में भोजशाला को पर्यटकों के लिए खोला गया और एक रुपये शुल्क निर्धारित कर प्रवेश व्यवस्था लागू की गई।

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