एक साल पहले बढ़ा मानदेय, नौ माह बाद होगा भुगतान:  चुनाव आयोग ने जुलाई 2025 में बीएलओ का मानदेय बढ़ाया, एमपी में अप्रैल 2027 के बाद होगा पेमेंट – Bhopal News

एक साल पहले बढ़ा मानदेय, नौ माह बाद होगा भुगतान: चुनाव आयोग ने जुलाई 2025 में बीएलओ का मानदेय बढ़ाया, एमपी में अप्रैल 2027 के बाद होगा पेमेंट – Bhopal News

बृजेन्द्र मिश्रा, भोपाल3 मिनट पहले

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एक साल पहले बढ़ा मानदेय, नौ माह बाद होगा भुगतान:  चुनाव आयोग ने जुलाई 2025 में बीएलओ का मानदेय बढ़ाया, एमपी में अप्रैल 2027 के बाद होगा पेमेंट – Bhopal News

मध्यप्रदेश में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और सुपरवाइजर को बढ़ा हुआ मानदेय मिलने का इंतजार अभी और लंबा होगा। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा करीब एक वर्ष पहले मानदेय बढ़ाने का निर्णय लेने के बावजूद इसका लाभ अब तक नहीं मिल सका है। अब मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि बढ़े हुए मानदेय का भुगतान 1 अप्रैल 2027 से शुरू किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने 30 जून को इस संबंध में सभी कलेक्टरों एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि भारत निर्वाचन आयोग ने 24 जुलाई 2025 को बीएलओ और सुपरवाइजर के मानदेय में वृद्धि के निर्देश दिए थे। इसके बाद मध्यप्रदेश के विधि एवं विधायी कार्य विभाग (निर्वाचन) ने 25 मई 2026 को इसे स्वीकृति प्रदान की।

हालांकि, स्वीकृति मिलने के बावजूद बढ़े हुए मानदेय का भुगतान चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में नहीं किया जाएगा। इसके बजाय नई दरें 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगी। तब तक बीएलओ और सुपरवाइजर को पुराने मानदेय के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा।

बीएलओ का मानदेय हुआ दोगुना

निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार बीएलओ का वार्षिक मानदेय 6 हजार रुपए से बढ़ाकर 12 हजार रुपए कर दिया गया है। वहीं बीएलओ सुपरवाइजर का वार्षिक मानदेय 12 हजार रुपए से बढ़ाकर 18 हजार रुपए किया गया है।

प्रदेश में 65 हजार से अधिक मतदान केंद्र हैं। प्रत्येक बीएलओ एक मतदान केंद्र की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि एक बीएलओ सुपरवाइजर के पास चार से पांच बूथों की निगरानी की जिम्मेदारी रहती है।

केंद्र और राज्य सरकार साझा करेंगी खर्च

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने निर्देश दिए हैं कि बढ़े हुए मानदेय पर होने वाला अतिरिक्त व्यय निर्वाचन नामावली की तैयारी एवं मुद्रण से संबंधित बजट मद से किया जाएगा। इस खर्च का वहन केंद्र और राज्य सरकार 50:50 के अनुपात में करेंगी।

विभाग के अनुसार, बीएलओ और सुपरवाइजर का मानदेय वर्ष में चार किस्तों (जून, सितंबर, दिसंबर और मार्च) में भुगतान किया जाएगा। कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निर्णय वित्त विभाग की सहमति के बाद लिया गया है।

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