कलेक्टर ने चबूतरे पर बैठकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं:  किसानों को धान छोड़ तिल, टमाटर और मशरूम जैसी फसलें अपनाने की सलाह – Gwalior News

कलेक्टर ने चबूतरे पर बैठकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं: किसानों को धान छोड़ तिल, टमाटर और मशरूम जैसी फसलें अपनाने की सलाह – Gwalior News

कलेक्टर ने चबूतरे पर बैठकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं:  किसानों को धान छोड़ तिल, टमाटर और मशरूम जैसी फसलें अपनाने की सलाह – Gwalior News


ग्वालियर जिला प्रशासन की जनसुनवाई व्यवस्था को गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल रविवार रात ग्राम बरेठा में आयोजित रात्रि चौपाल में देखने को मिली। जनपद पंचायत मुरार के अंतर्गत आने वाले इस गांव में ग्राम पंचायत भवन के सामने चबूतरे पर आयोजित चौपाल में कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। पूरे कार्यक्रम में औपचारिकता से अधिक संवाद का माहौल रहा। ग्रामीणों ने बेझिझक अपनी समस्याएं रखीं और कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देकर समाधान सुनिश्चित कराया गया। चौपाल के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 88 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कई का तत्काल निराकरण किया गया, जबकि शेष मामलों के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। चौपाल में सबसे अधिक चर्चा खरीफ फसल और इस वर्ष की बारिश की स्थिति को लेकर हुई। कलेक्टर ने किसानों से खेती की तैयारियों की जानकारी ली तो अधिकांश किसानों ने धान की बुवाई करने की बात कही। इस पर उन्होंने किसानों को मौसम के बदलते रुख और कम वर्षा की संभावना से अवगत कराते हुए कहा कि इस वर्ष वर्षा सामान्य से कम होने की आशंका है। वैकल्पिक फसलों को अपनाना लाभकारी ऐसे में अधिक पानी की आवश्यकता वाली धान जैसी फसल के बजाय कम पानी में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा देने वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाना किसानों के लिए लाभकारी होगा।
कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने किसानों को तिल, टमाटर, मिर्च और मशरूम जैसी नकदी फसलों की वैज्ञानिक खेती, लागत और संभावित आय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इन फसलों से कम पानी में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है और बाजार में इनकी अच्छी मांग होने से किसानों को अधिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है। विभागीय विशेषज्ञों की सलाह से प्रभावित होकर चौपाल में ही 20 किसानों ने तिल की खेती, जबकि 10-10 किसानों ने टमाटर और मशरूम उत्पादन अपनाने के लिए अपने नाम दर्ज कराए। प्रशासन ने इन किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिलाया। रात्रि चौपाल केवल समस्याएं सुनने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को तत्काल राहत भी मिली। गांव की निवासी रेखा ने कलेक्टर को बताया कि उनके पति ब्रजकिशोर लकवाग्रस्त हैं और परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। बातचीत के दौरान पता चला कि ब्रजकिशोर का संबल कार्ड बना हुआ है, लेकिन जानकारी के अभाव में परिवार ने योजना के तहत मिलने वाली सहायता के लिए आवेदन नहीं किया था। इस पर कलेक्टर ने श्रम विभाग के अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए कि संबल योजना के तहत एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता शीघ्र स्वीकृत कराई जाए। सहायता मिलने की जानकारी से रेखा भावुक हो गई और उसने कहा कि वह इस राशि से सिलाई मशीन खरीदकर परिवार की आजीविका शुरू करेगी तथा आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करेगी। चौपाल में एक अन्य संवेदनशील मामला भी सामने आया। इरफान नामक एक किशोर की आंखों की गंभीर समस्या की जानकारी मिलने पर कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि उसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराकर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उसकी आंखों का समय पर इलाज हो सके। ग्रामीणों ने राजस्व विभाग से जुड़े सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे के कई मामले भी चौपाल में रखे। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित पक्षों, राजस्व अधिकारियों और पटवारियों को मौके पर बुलाकर प्रकरणवार चर्चा की। प्रत्येक मामले के समाधान के लिए कार्ययोजना तैयार की गई और अधिकारियों को तय समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। चौपाल में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजन सिंह रावत, जनपद पंचायत अध्यक्ष दिलराज सिंह किरार सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों ने अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित शिकायतों को सुना और कई मामलों का मौके पर ही निराकरण किया।

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