कोलकाता:भारी बारिश के बीच भूपेन दा को सौ दीयों से नमन, संगीत प्रेमियों ने याद किया – Bharat Ratna Bhupen Hazarika Followers And Musical Lovers Pay Tribute To Legends

कोलकाता:भारी बारिश के बीच भूपेन दा को सौ दीयों से नमन, संगीत प्रेमियों ने याद किया – Bharat Ratna Bhupen Hazarika Followers And Musical Lovers Pay Tribute To Legends

भारी बारिश भी संगीत प्रेमियों के कदम नहीं रोक सकी। भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशती पर मंगलवार को कोलकाता में उन्हें अनूठे अंदाज में श्रद्धांजलि दी गई। टॉलीगंज स्थित उस भवन के नीचे सौ दीये जलाए गए, जहां भूपेन दा ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों में रहकर संगीत की साधना की थी। बारिश के बीच जलते सौ दीयों की रोशनी और भूपेन हजारिका के गीतों ने माहौल को भावुक बना दिया। असम और बंगाल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए संगीत प्रेमियों और कलाकारों ने इसमें हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता असमिया सांस्कृतिक संस्था की ओर से किया गया। सौ दीयों की रोशनी के बीच भूपेन हजारिका के गीतों की प्रस्तुति हुई। कलाकारों ने माइम के जरिए भी उनके जीवन, संगीत और मानवीय संवेदनाओं को मंच

पर जीवंत किया। बारिश के बावजूद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भूपेन दा के गीतों के साथ उनकी स्मृतियों को साझा किया और उनके संगीत को नमन किया।

साधना-स्थल को स्मारक बनाने की पहल

कार्यक्रम में भूपेन हजारिका से जुड़े इस भवन को स्मारक के रूप में विकसित करने की मांग भी प्रमुखता से उठी। संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष हितेन हाटखुवा ने बताया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस ऐतिहासिक

भवन को स्मारक के रूप में विकसित करने के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से बातचीत की है। हाटखुवा ने उम्मीद जताई कि जिस भवन में भूपेन हजारिका ने रहकर वर्षों तक संगीत की साधना की, उसे संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए स्मारक के रूप में विकसित किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि यह स्थान केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय संगीत और सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण विरासत है।

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संगीत में मानवता और भाईचारे का संदेश

हाटखुवा ने कहा कि भूपेन हजारिका का योगदान किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं था। उनका संगीत असम और बंगाल की सांस्कृतिक सीमाओं को पार करते हुए देश और दुनिया के लोगों तक पहुंचा। उनके गीतों में मानवता, समानता,

भाईचारे और सामाजिक सरोकारों की गहरी भावना दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि ‘मानुहे मानुहर बाबे’ जैसे भूपेन दा के गीत आज भी इंसानियत और एक-दूसरे के प्रति संवेदना का संदेश देते हैं। यही वजह है कि उनकी जन्मशती पर कोलकाता में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम महज स्मरण का अवसर नहीं रहा, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प भी बना।

सौ दीयों की रोशनी में भूपेन दा के गीतों की गूंज और भारी बारिश के बीच जुटे संगीत प्रेमियों ने यह संदेश दिया कि महान कलाकारों की स्मृतियां समय और मौसम की सीमाओं से परे होती हैं।

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