गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना को लेकर घरों में विशेष तैयारियां की जाती हैं। पूजा स्थल की सजावट से लेकर पूजन सामग्री तक, हर चीज का अपना महत्व माना जाता है। इन्हीं तैयारियों में कलश स्थापना भी एक महत्वपूर्ण परंपरा है। कई घरों में गणपति बप्पा की प्रतिमा के साथ कलश स्थापित किया जाता है और इसे पूजा की शुभ शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश को पवित्रता, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कलश स्थापना की विधि कुछ अलग हो सकती है। इसलिए अपने घर की परंपरा और पूजा-पद्धति के अनुसार नियमों का पालन करना बेहतर माना जाता है।

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अक्षत, सिक्का और सुपारी जैसी शुभ वस्तुएं रखी जा सकती हैं।
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कलश में क्या-क्या रखा जाता है?
गणेश स्थापना के समय कलश तैयार करने के लिए आमतौर पर उसमें साफ जल भरा जाता है। इसके साथ अक्षत, सिक्का और सुपारी जैसी शुभ वस्तुएं रखी जा सकती हैं। कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा भी प्रचलित है। कुछ विधियों में नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित किया जाता है और कलश पर मौली बांधी जाती है। इस तरह कलश को केवल एक पात्र के रूप में नहीं, बल्कि पूजा में शुभता और पवित्रता के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।

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इसके बाद कलश में शुद्ध जल भरें। अपनी परंपरा के अनुसार इसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का आदि डाल सकते हैं।
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ऐसे करें कलश स्थापना की तैयारी
- सबसे पहले पूजा की जगह को साफ करके चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं।
- इसके बाद कलश में शुद्ध जल भरें। अपनी परंपरा के अनुसार इसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का आदि डाल सकते हैं।
- अब कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखें और उनके ऊपर नारियल स्थापित करें।
- नारियल को लाल कपड़े में लपेटना और कलश पर मौली बांधना भी कई पूजा-विधियों में बताया गया है।
- इसके बाद कलश को गणेश जी की प्रतिमा के पास उचित स्थान पर रखें।

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ganesh chaturthi
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गणेश जी की स्थापना के समय क्या अर्पित करें?
कलश स्थापना के बाद गणपति बप्पा की पूजा विधि से की जाती है। भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है। भोग में मोदक या लड्डू के साथ फल और अन्य मिठाइयां रखी जा सकती हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती और मंत्र जाप किया जाता है।

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कब है गणेश चतुर्थी?
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कब है गणेश चतुर्थी?
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी। गणेश पूजा का मध्याह्न मुहूर्त लगभग सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। शहर के अनुसार समय में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
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