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झाबुआ जिले के ग्राम करवड़ में अवैध स्वास्थ्य सेवाओं के कारण गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। बिना डिग्री वाले झोलाछाप डॉक्टर उपयोग किए गए इंजेक्शन, कांच की बोतलें और अन्य खतरनाक बायो-मेडिकल वेस्ट खुलेआम सार्वजनिक मार्गों पर फेंक रहे हैं। यह न केवल इंसानों के लिए, बल्कि पर्यावरण और पशुधन के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। करवड़-बारी गांव के केसरपुरा रोड पर यह गंदगी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। हैरानी की बात यह है कि इस स्थान से कुछ ही दूरी पर ग्राम पंचायत की अशोक वाटिका स्थित है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ये अवैध क्लीनिक लंबे समय से प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे हैं, लेकिन इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जिस मार्ग पर यह खतरनाक कचरा फेंका जा रहा है, वह चार-पांच गांवों को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता है। यहां से दिनभर ग्रामीण और स्कूली बच्चे गुजरते हैं। खुले में पड़ी इस्तेमाल की हुई सुइयां और कांच के टुकड़े कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना या गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं। कचरा फेंके जाने वाले इन स्थानों के आसपास पशुपालकों के मवेशी जैसे गाय, भैंस और बकरियां घास चरते हैं। कचरे में लिपटे खतरनाक मेडिकल वेस्ट के कारण पशुओं के बीमार होने का डर है। यदि इन मवेशियों को कोई संक्रमण होता है, तो यह दूध के माध्यम से इंसानों तक भी पहुंच सकता है, जिससे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निपटान के लिए सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस मामले पर झाबुआ के सीएमएचओ डॉ. एमएल चौपड़ा ने स्वीकार किया कि खुले में मेडिकल कचरा फेंकना पूरी तरह गलत और नियम विरुद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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