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आगर मालवा के ग्राम बराई में ट्रांसफॉर्मर पर काम करते समय करंट लगने से बिजली कर्मचारी चेनसिंह की मौत हो गई। गुरुवार सुबह पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पीड़ावा रोड चौराहे पर चक्काजाम कर 50 लाख का मुआवजा मांगा। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है। कर्मचारी ट्रांसफॉर्मर पर कार्य कर रहा था और नियमानुसार परमिट जारी था, तब बिजली सप्लाई कैसे शुरू हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी गंभीर लापरवाही के कारण चेन सिंह कंडारा की जान गई। प्रदर्शनकारियों ने पहले बिजली ग्रिड पर चर्चा का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद उन्होंने दोबारा चक्काजाम शुरू कर दिया। उनकी मुख्य मांगों में मृतक के परिवार के लिए 50 लाख रुपए का मुआवजा, अनुकंपा नियुक्ति, पेंशन और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल थी। प्रदर्शन के दौरान बिजली कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लगभग दो घंटे तक चले इस चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। सूचना मिलने पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक भेरूसिंह परिहार और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों तथा ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें शांत कराया। इस वार्ता के दौरान मृतक के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई। बिजली कंपनी ने मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, विधायक भेरूसिंह परिहार ने व्यक्तिगत रूप से 1 लाख रुपये और नगर परिषद प्रतिनिधि ने 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने का ऐलान किया। परिजनों को शासन के नियमानुसार स्वीकृत होने वाली अन्य सहायता राशि भी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। इन घोषणाओं और आश्वासनों के बाद प्रदर्शनकारियों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप यातायात सामान्य हो गया। इस घटना के बाद बढ़ते जनदबाव के चलते बिजली कंपनी ने प्रारंभिक कार्रवाई की है। अधीक्षण यंत्री कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, सोयत वितरण केंद्र में कार्यरत दो आउटसोर्स कर्मचारियों, मुकेश दांगी और योगेंद्र चौधरी को गंभीर लापरवाही और अनियमितता के आरोप में तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है। हालांकि ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि केवल कर्मचारियों को हटाना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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