
मार्किंग सिस्टम को समझाते हुए संजय कुमार ने बताया कि, सबसे पहले आंसर शीट को एक सीक्रेट कोड दिया जाता है। इसके बाद कॉपियों की क्वालिटी चेक की जाती है। हर सेट की मार्किंग स्कीम अलग होती है जिसे विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाता है और दूसरे विशेषज्ञों की टीम उसकी दोबारा जांच करती है। वहीं स्टूडेंट्स का कहना है कि, डिजिटल चेकिंग में स्टेप-वाइज मार्किंग होने से उनके अंक कम हुए हैं।
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