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तृणमूल कांग्रेस के कई बाग़ी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाक़ात की है. इस मुलाक़ात के बाद टीएमसी सांसदों ने अपने गुट का नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी ऑफ़ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ विलय करने की घोषणा की है.
काकोली घोष दस्तीदार ने ओम बिरला से मुलाक़ात करने के बाद पत्रकारों से कहा, ”हम अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के चुने हुए सांसद थे. हमने लोकसभा स्पीकर को अपनी नाराज़गी के बारे में बताया.”
दस्तीदार ने आगे कहा, “हमने संसद में अलग से बैठने की मांग की और हम नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी के साथ विलय कर रहे हैं. हमारे साथ 20 सांसद हैं जो तृणमूल के 28 सांसदों के दो- तिहाई से ज़्यादा हैं. हम एआईटीसी से अलग होकर एनडीए के साथ काम करेंगे.”
उनके इस बयान के बाद कई लोग नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी के बारे में जानने को उत्सुक हैं. आख़िर ये कौन सी पार्टी है और इसकी राजनीतिक ताक़त क्या है, जिसकी वजह से टीएमसी के 20 सांसद इस पार्टी में विलय की बात कर रहे हैं.
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता नीलांजन दास ने पार्टी के बाग़ी नेताओं पर तंज करते हुए एक्स पर लिखा, “ये नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सिउली कुंडू हैं, जो अब 20 तृणमूल कांग्रेस के दलबदलुओं की नई नेता हैं.”
उन्होंने आगे लिखा, “जो लोग ट्विन फ़्लावर्स चुनाव चिह्न (टीएमसी) पर जीते थे, वे अब उस पार्टी में शरण मांग रहे हैं जिसके बारे में बंगाल ने कभी नहीं सुना था. काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा स्पीकर से एनसीपीआई (एनडीए सहयोगी) के रूप में मान्यता की मांग करते हुए दावा किया कि उनके साथ टीएमसी संसदीय दल के 2/3 सदस्य हैं.”
नीलांजन दास के मुताबिक़, “अब तक टीएमसी के किसी कार्यकर्ता ने सार्वजनिक रूप से इस संगठन में शामिल होने में कोई रुचि नहीं दिखाई है. एनसीपीआई का पश्चिम बंगाल में कोई संगठन नहीं है और फ़ेसबुक पर उसके 72 फॉलोअर्स हैं.”
एनसीपीआई कब बनी
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रविवार रात के अचानक चर्चा में आई नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी के फ़ेसबुक पेज पर फ़ॉलोअर्स की संख्या बढ़ने लगी है. कहानी लिखे जाने तक इसके फ़ॉलोअर्स की संख्या 500 से ज़्यादा हो गई है.
हालाँकि यह फ़ेसबुक पेज न तो वेरिफ़ाइड है और न ही ऑफ़िशियल पेज है.
चुनाव आयोग के मुताबिक़, नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी पश्चिम बंगाल की एक ग़ैर मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी है.
यह राज्य के हावड़ा ज़िले के पते पर रजिस्टर्ड है. यह पार्टी साल 2022 में रजिस्टर्ड हुई थी.
चुनाव आयोग ने, नियमों के मुताबिक़ इस पार्टी के रजिस्ट्रेशन से पहले अगर किसी को इस पर आपत्ति हो तो उनसे इसका कारण समेत एक महीने के अंदर सूचना देने को कहा था.
इस राजनीतिक दल के संस्थापक अध्यक्ष के तौर पर सिउली कुंडू, महासचिव के तौर पर सैकत दास और ट्रेज़रर के तौर पर सुदम जेट्टी का नाम दर्ज है.
साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी (एनसीपीआई) ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे. इसमें उसे कुल 822 वोट मिले थे. यह वोट इन सीटों पर हुई कुल वोटिंग का महज़ एक प्रतिशत था.
एनसीपीआई का सिंबल क्या है
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एनसीपीआई अब तक एक बहुत ही छोटा सियासी दल है और नीलांजन दास ने इसके बारे में जो जानकारी दी है उसके मुताबिक़ इस पार्टी का सिंबल एक पेन है.
दिलचस्प है कि एनसीपीआई ने फ़ेसबुक पेज पर सोमवार को एक पोस्ट में दावा किया कि उसके पास पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 20 सीटें हैं.
चुनाव आयोग का ऑडिट रिपोर्ट क्या कहता है
वहीं साल 2024-25 की पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वार्षिक रिपोर्ट में एनसीपीआई के नाम तक का ज़िक्र नहीं है.
एनसीपीआई ने अपने नेता के बारे में क्या बताया
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एनसीपीआई के ताज़ा फ़ेसबुक पोस्ट के मुताबिक़, काकोली घोष दस्तीदार लोकसभा में इस पार्टी की नई नेता हैं. उसने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हमारा साथ देने के लिए धन्यवाद.”
ख़ास बात यह है कि एनसीपीआई ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का भी पार्टी में स्वागत करते हुए एक तस्वीर फ़ेसबुक पर पोस्ट की है.
काकोली घोष दस्तीदार का साथ दे रहे पार्टी के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने रविवार को कहा, “हम नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी में विलय कर रहे हैं. यह क्षेत्रीय पार्टी है. एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है. अब असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इसका फ़ैसला अदालत करेगी.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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