राज्य शासन सवा करोड़ ”लाड़ली बहनों” को हर माह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है। एक माह के लिए प्रति महिला सिर्फ दो रूपये कम कर दिए जाएं तो बच्च …और पढ़ें

HighLights
- एडवोकेट ने बताया बच्ची पिछले कई माह से तरल आहार पर है।
- शर्त है कि बच्ची का वजन 13 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए।
- बच्ची का वजन नियंत्रित रखना स्वजन के लिए एक चुनौती है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। गंभीर बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 से जूझ रही साढ़े तीन साल की बच्ची अनिका को लगने वाले नौ करोड़ रुपये कीमत के इंजेक्शन का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है।
इस संबंध में एक याचिका प्रस्तुत हुई है। याचिका की सुनवाई के दौरान वकीलों ने तर्क रखा कि इंजेक्शन के लिए सात करोड़ रुपये एकत्रित किए जा चुके हैं।
राज्य शासन सवा करोड़ ”लाड़ली बहनों” को हर माह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है। एक माह के लिए प्रति महिला सिर्फ दो रूपये कम कर दिए जाएं तो बच्ची के उपचार के खर्च की व्यवस्था हो जाएगी और एक जान बच जाएगी।
इस तर्क को सुनने के बाद कोर्ट ने सरकारी वकील से मौखिक रूप से पूछा कि क्या ये बच्ची लाड़ली बहना नहीं है। मामले में अगली सुनवाई 22 जून को होगी।
यह बच्ची द्वारकापुरी क्षेत्र में रहती है। इसे अत्यंत दुर्लभ और गंभीर बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी टाइप 2 है। इस बीमारी का उपचार दवा जोलगेन्स्मा है जिसे दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में गिना जाता है।
इसकी कीमत नौ करोड़ रुपये है। याचिका दायर करने वाले एडवोकेट चंचल गुप्ता और एडवोकेट लखन शर्मा ने बताया कि परिवार अब तक संस्थाओं और समाज की मदद से करीब सात करोड़ रुपये एकत्रित कर चुका है।
एडवोकेट शर्मा ने बताया कि बच्ची पिछले कई माह से सिर्फ तरल आहार पर है। उसे जो इंजेक्शन लगना है उसकी शर्त है कि बच्ची का वजन 13 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। बच्ची का वजन नियंत्रित रखना स्वजन के लिए एक चुनौती है।
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