न्यूज डायरी:कोलकाता में 7 जनवरी से प्रवासी भारतीय सम्मेलन; क्वांटम-सिक्योर कम्युनिकेशन लिंक का सफल परीक्षण – National Updates 4th Oct Pravasi Bharatiya Divas Kolkata North East West South Politics Crime And Other News
“_id”:”6ac179f5c0b9e9429d012453″,”slug”:”national-updates-4th-oct-pravasi-bharatiya-divas-kolkata-north-east-west-south-politics-crime-and-other-news-2026-10-04″,”type”:”feature-story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”न्यूज डायरी: कोलकाता में 7 जनवरी से प्रवासी भारतीय सम्मेलन; क्वांटम-सिक्योर कम्युनिकेशन लिंक का सफल परीक्षण”,”category”:”title”:”India News”,”title_hn”:”देश”,”slug”:”india-news”
आज की बड़ी खबरें। – फोटो : अमर उजाला
19वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन अगले साल 7 से 9 जनवरी के बीच कोलकाता में होगा। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इसकी घोषणा की। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सम्मेलन का आयोजन मंत्रालय पश्चिम बंगाल सरकार के साथ साझेदारी में करेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान करेंगी और समापन सत्र की अध्यक्षता करेंगी। सम्मेलन में ‘यूथ पीबीडी’ खंड भी होगा। इसमें दुनियाभर से भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य, युवा प्रवासी नेता, उद्यमी, पेशेवर, शिक्षाविद और नवोन्मेषक समेत अन्य हितधारक शामिल होंगे। प्रवासी भारतीय दिवस महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने की स्मृति में हर वर्ष मनाया जाता है। गांधी 9 जनवरी 1915 को भारत लौटे थे।
क्वांटम-सिक्योर कम्युनिकेशन लिंक का सफल परीक्षण
भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क की दिशा में एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। देश में पहली बार 5.56 किलोमीटर की दूरी पर ‘फ्री-स्पेस’ क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन लिंक का सफल प्रदर्शन किया गया है। क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क एक ऐसी अत्याधुनिक और भविष्य की सुरक्षा प्रणाली है, जिसे हैक करना या इसमें से डाटा चोरी करना पूरी तरह से असंभव माना जाता है। यह फील्ड ट्रायल 27-28 सितंबर की रात को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। परीक्षण एक भारतीय क्वांटम टेक स्टार्टअप क्यूएन-यू लैब्स, व भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशंस एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स और आईआईटी गांधीनगर के संयुक्त सहयोग से किया गया। आमतौर पर क्वांटम संचार के लिए जमीन के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल की जरूरत होती है। लेकिन इस परीक्षण में ‘फ्री-स्पेस’ (खुली हवा) तकनीक का उपयोग किया गया।