इंदौर में महंगाई ने मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। जनवरी से जून के बीच रोजमर्रा की चीजों पर खर्च हर महीने 4.5 से 6 हजार रुपये बढ़ ग …और पढ़ें

HighLights
- एक परिवार का खर्च 25 हजार से बढ़कर 29 से 31 हजार रुपये हो गया है
- बचत घट रही है, सालाना 54 से 72 हजार रुपये तक अतिरिक्त बोझ का अनुमान है
- खाद्य तेल, दाल, दूध, सब्जी, एलपीजी, बिजली, पेट्रोल, परिवहन सब महंगे
कुलदीप भावसार, नईदुनिया, इंदौर। महंगाई अब केवल आर्थिक आंकड़ों का विषय नहीं रह गई है, बल्कि हर घर की रसोई, जेब और मासिक बजट को सीधे प्रभावित कर रही है। पांच महीने पहले तक जिस आय में एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार अपना खर्च अपेक्षाकृत सहजता से संभाल लेता था, आज उसी परिवार को हर महीने 4.5 से छह हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।
इसका असर बचत, निवेश और जीवनशैली पर दिखाई देने लगा है। एक औसत पांच सदस्यीय परिवार (पति-पत्नी, एक बच्चा, दादा और दादी) के घरेलू बजट के आकलन से पता चलता है कि जनवरी की तुलना में जून में रोजमर्रा की कई आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं महंगी हुई हैं। खाद्य तेल, दाल, दूध, सब्जियां, फल, एलपीजी, पेट्रोल, बिजली और स्थानीय परिवहन पर खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
सबसे ज्यादा असर किचन पर
सबसे अधिक असर रसोई के बजट पर दिखाई दे रहा है। जनवरी में जिस परिवार का मासिक खाद्य बजट करीब 11 हजार रुपये था, वह अब बढ़कर लगभग 14.5 हजार रुपए तक पहुंच गया है। फल और सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कई परिवारों ने अपनी खरीदारी की प्राथमिकताओं में बदलाव किया है। बाहर भोजन करने और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती भी देखने को मिल रही है।
महंगाई का प्रभाव केवल खाने-पीने तक सीमित नहीं है। एलपीजी, बिजली और परिवहन पर बढ़ा खर्च घरेलू बजट का संतुलन बिगाड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों के नाश्ते, टिफिन और आवागमन पर भी पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च हो रही है। जिन परिवारों का मासिक खर्च जनवरी में करीब 25 हजार रुपए था, उनका खर्च अब 29.5 से 31 हजार रुपए के बीच पहुंच रहा है।

सालाना 72 हजार रुपये तक आर्थिक बोझ बढ़ने का अनुमान
अर्थशास्त्रियों के अनुसार ईंधन, परिवहन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का संयुक्त प्रभाव आम उपभोक्ता तक पहुंच रहा है। यदि आने वाले महीनों में यही रुझान जारी रहा तो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बचत करना और मुश्किल हो सकता है। वर्तमान स्थिति में एक परिवार पर सालाना 54 हजार से 72 हजार रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने का अनुमान है।
परिवहन लागत बढ़ने से बढ़ रही कीमतें
परिवहन लागत बढ़ने की वजह से रोजमर्रा जरूरत की चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। वजह है कि ईंधन की लागत भी बढ़ गई है। आने वाले समय में इसका और व्यापक असर देखने को मिलेगा। – रमेश खंडेलवाल, अध्यक्ष अहिल्या चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री
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