पार्षद कमलेश कालरा के जाति प्रमाणपत्र को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को नया मोड़ आ गया। कालरा के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता ने …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पार्षद कमलेश कालरा के जाति प्रमाणपत्र को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को नया मोड़ आ गया। कालरा के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता ने रिजाइंडर प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने कहा कि कालरा ने खुद को ओबीसी केटेगरी का बताते हुए समर्थन में जिन दो लोगों के प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे, वो दोनों ओबीसी प्रमाण पत्र निरस्त किए जा चुके हैं।
एसडीएम जूनी इंदौर के आदेश से निरस्त हुए थे दोनों प्रमाण-पत्र
याचिका दायर करने वाले सुनील यादव के अनुसार कालरा ने अपने समर्थन में चंद्र कुमार और जयेश राजानी के नाम से जारी अन्य पिछड़ा वर्ग जाति प्रमाण पत्रों का उल्लेख किया था, लेकिन एसडीएम जूनी इंदौर के आदेश से ये प्रमाण पत्र निरस्त हो चुके हैं। एसडीएम के आदेश के अनुसार, यह कार्रवाई आदर्श सचान की शिकायत पर की गई जांच के बाद हुई।
जांच के दौरान जयेश राजानी ने 15 अप्रैल 2026 को दिए गए बयान में कहा कि उन्होंने जाति प्रमाणपत्र के लिए कोई आवेदन नहीं किया था तथा उनके नाम से प्रमाणपत्र त्रुटिवश जारी हुआ है। उन्होंने इसके निरस्तीकरण पर भी कोई आपत्ति नहीं जताई।
मध्य प्रदेश की पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल नहीं है सिंधी जाति
आदेश में यह भी कहा है कि कलेक्टर की अनुमति से जांच की गई। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विभाग के 13 अक्टूबर 2025 के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की पिछड़ा वर्ग सूची में सिंधी जाति शामिल नहीं है। इसी आधार पर दोनों ओबीसी प्रमाणपत्र निरस्त किए गए।
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