
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दोनों योजनाओं में आधार नंबर, बैंक खाते, मोबाइल नंबर और पात्रता सत्यापन की बहुस्तरीय व्यवस्था लागू है, तब एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग योजनाओं में पात्र कैसे घोषित हो गया? यदि आधार आधारित सत्यापन प्रभावी था तो दोहरी स्वीकृति संभव ही नहीं होनी चाहिए थी। विभागीय जानकारों का कहना है इसमें या तो लाभार्थी ने जानबूझकर जानकारी छिपाई या फिर स्थानीय स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई।
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