फसल बीमा के लिए इंदाैर से दिल्ली तक किसानों ने नौ साल लड़ी लड़ाई, अब मिलेेगा क्लेम

फसल बीमा के लिए इंदाैर से दिल्ली तक किसानों ने नौ साल लड़ी लड़ाई, अब मिलेेगा क्लेम

सोयाबीन फसल में भारी नुकसान झेलने वाले किसानों को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राहत मिली है। पोर्टल पर पटवारी हल्का नंबर की गलत एंट्री के कारण बीमा क्लेम …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 02 Jun 2026 08:52:36 AM (IST)Updated Date: Tue, 02 Jun 2026 08:52:36 AM (IST)

फसल बीमा के लिए इंदाैर से दिल्ली तक किसानों ने नौ साल लड़ी लड़ाई, अब मिलेेगा क्लेम
किसानों को मिला न्याय। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. कनाड़िया के किसानों के पक्ष में हुए निर्णय को दिल्ली आयोग ने रखा बरकरार, भुगतान के आदेश
  2. पोर्टल पर पटवारी हल्का नंबर की गलत एंट्री के कारण बीमा क्लेम से वंचित रहे थे किसान
  3. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ग्राम कनाडिया के पांच किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वर्ष 2017 की सोयाबीन फसल में भारी नुकसान झेलने वाले कनाड़िया के किसानों को आखिरकार लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राहत मिली है। पोर्टल पर पटवारी हल्का नंबर की गलत एंट्री के कारण बीमा क्लेम से वंचित रहे किसानों ने इंदौर से लेकर दिल्ली तक न्याय की लड़ाई लड़ी।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ग्राम कनाडिया के पांच किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी, को आपरेटिव बैंक और सहकारी समिति ग्राम कनाड़िया को बीमा क्लेम राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह राशि 60 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया था। मामले में राष्ट्रीय आयोग में पुनरीक्षण याचिका लगाई गई थी, लेकिन राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश को बरकरार रखा।

दरअसल खरीफ वर्ष 2017 की सोयाबीन फसल को लगभग 57 प्रतिशत नुकसान हुआ था, लेकिन इसके बावजूद कनाड़िया के 135 किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा नहीं मिल सका। जांच में सामने आया कि किसानों की जमीन ग्राम कनाडिया के पटवारी हल्का नंबर-49 में स्थित थी, लेकिन पोर्टल पर गलती से पटवारी हल्का नंबर-39 भुलारिया की प्रविष्टि दर्ज कर दी गई। इस तकनीकी त्रुटि के कारण किसानों को फसल नुकसान का पात्र नहीं माना गया और वे बीमा राशि से वंचित रह गए।

135 किसान प्रभावित हुए थे

किसान राधेश्याम मंडलोई ने बताया कि पोर्टल पर गलती के कारण 135 किसान प्रभावित हुए थे, जिन्हें पात्र होने के बावजूद वर्ष 2017 की फसल क्षतिपूर्ति राशि नहीं मिल सकी। आयोग ने माना कि पोर्टल पर गलत जानकारी दर्ज करने के लिए बैंक और सेवा सहकारी संस्था जिम्मेदार हैं। वहीं, बीमा कंपनी द्वारा प्रीमियम राशि लेने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं करना सेवा में कमी माना गया।आयोग ने प्रत्येक परिवादी को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 5-5 हजार रुपये और प्रकरण व्यय के रूप में 5-5 हजार रुपये भी देने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का पालन 60 दिनों में नहीं होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

यह था मामला

वर्ष 2017 में सोयाबीन मुआवजा राशि नहीं मिलने पर पांच किसानों हिंदुसिंह मंडलोई, राधेश्याम मंडलोई, ओमप्रकाश, छतरसिंह आैर बाबूलाल मंडलोई द्वारा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग इंदौर में प्रकरण लगाया गया।आयोग ने 6 फरवरी 2024 को कनाडिया के पांच किसानों के पक्ष में आदेश देते हुए क्षतिपूर्ति राशि देने के निर्देश एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी, इंदौर प्रीमियर को-आपरेटिव बैंक और सेवा सहकारी संस्था को दिए।

इसके विरोध में मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग भोपाल में अपील की गई, लेकिन वहां भी फैसला किसानों के पक्ष में आया। हालांकि यहां इंश्योरेंश कंपनी को क्लेम की जिम्मेदारी से बाहर कर इंदौर प्रीमियर को-आपरेटिव बैंक और सेवा सहकारी संस्था कनाड़िया को भुगतान करने के आदेश दिए गए। इसके बाद इंदौर प्रीमियर को-आपरेटिव बैंक ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, नई दिल्ली में पुनरीक्षण याचिका दायर की, लेकिन राष्ट्रीय आयोग ने भी निचली उपभोक्ता आयोग के आदेश को बरकरार रखा। आयोग ने तीन किसानों राधेश्याम, ओमप्रकाश और बाबूलाल मंडलोई का बीमा राशि देने के आदेश दिए। वहीं छतरसिंह, हिंदुसिंह मंडलोई की मृत्यु होने से वारिसों को मुआवजा दिया जाएगा।

“घेरा डालो डेरा डालो” आंदोलन : सड़क पर उतरे किसान, जाम लगने से यातायात हुआ प्रभावित

www.naidunia.com
#फसल #बम #क #लए #इदर #स #दलल #तक #कसन #न #न #सल #लड #लडई #अब #मलग #कलम

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *