भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी… ASI ने मस्जिद पक्ष की आपत्तियों को बताया निराधार, निर्णय सुरक्षित

भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी… ASI ने मस्जिद पक्ष की आपत्तियों को बताया निराधार, निर्णय सुरक्षित

धार स्थित भोजशाला का धार्मिक स्वरूप निर्धारित करने को लेकर हाई कोर्ट में चल रही चार याचिकाओं और एक अपील में मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई। …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 12 May 2026 09:53:40 PM (IST)Updated Date: Tue, 12 May 2026 09:53:40 PM (IST)

भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी… ASI ने मस्जिद पक्ष की आपत्तियों को बताया निराधार, निर्णय सुरक्षित
भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार स्थित भोजशाला का धार्मिक स्वरूप निर्धारित करने को लेकर हाई कोर्ट में चल रही चार याचिकाओं और एक अपील में मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के अंतिम दिन मंगलवार को मस्जिद पक्ष और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपने-अपने तर्क पूरे किए। एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने सर्वे को लेकर मस्जिद पक्ष द्वारा ली गई आपत्तियों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि सर्वे में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया और यह पूरी तरह से हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए किया गया।

कार्बन डेटिंग और मूर्तियों के कालखंड पर एएसआई का तर्क

मस्जिद पक्ष का कहना है कि सर्वे में मिली मूर्तियों की कार्बन डेटिंग नहीं की गई। इस पर एएसआई ने स्पष्ट किया कि दरअसल इसकी आवश्यकता ही नहीं थी, क्योंकि कार्बन डेटिंग से यह तो पता चल सकता है कि कोई पत्थर कितना पुराना है, लेकिन उस पत्थर को तराश कर मूर्ति कब बनाई गई यह जानकारी कार्बन डेटिंग से पता नहीं मिलती। इसके लिए साइंटिफिक अध्ययन करना होता है, जो एएसआई द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने 6 अप्रैल 2026 से इस मामले में नियमित सुनवाई शुरू की थी, जो प्रत्येक कार्य दिवस पर दोपहर ढाई से साढे चार बजे तक संचालित हो रही थी।

मस्जिद पक्ष की दलीलें और मलबे से निर्माण का दावा

मंगलवार को ठीक ढाई बजे मस्जिद पक्ष की ओर से एडवोकेट अशहर वारसी ने तर्क रखना शुरू किए। उन्होंने वर्ष 1925 की एक पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा की वजह से धार तहस-नहस हो गया था। भूकंप ने यहां के भवनों को बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया था और पुराने भवनों के मलबे का इस्तेमाल करते हुए ही मस्जिद का निर्माण किया गया था। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने एएसआई की ओर से इन आपत्तियों का जवाब देते हुए इन्हें निराधार बताया।

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मस्जिद पक्ष की आपत्ति एएसआई (ASI) का जवाब
मूर्तियों की कार्बन डेटिंग क्यों नहीं की गई? कार्बन डेटिंग पत्थर की उम्र बता सकती है, तराशने का समय नहीं। इसके लिए जरूरी साइंटिफिक अध्ययन किया गया है।
सर्वे में प्लास्टिक बोतलें और अखबार मिले, ये पुराने कैसे हो सकते हैं? सर्वे रिपोर्ट में इनका उल्लेख है। जमीन साफ करते समय सालों से जमा गंदगी हटाई गई थी, वीडियोग्राफी में वही कचरा बाहर ले जाते दिख रहा है।
परिसर में वजूखाना मौजूद है। फोटोग्राफ बताते हैं कि जिसे वजूखाना कहा जा रहा है, वहां ईंटें बाद में लगाई गई हैं। अन्य मस्जिदों के मुकाबले यह वजूखाना है ही नहीं।
गौतम बुद्ध की मूर्ति मिलने की जानकारी छिपाई गई। मूर्ति मिली थी, लेकिन वह भगवान बुद्ध की नहीं बल्कि जैन भगवान की थी। इसका स्पष्ट उल्लेख सर्वे रिपोर्ट में किया गया है।

मामले के प्रमुख पक्षकार और उनके अधिवक्ता

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