भोजशाला: सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- विधिसम्मत तरह से वाग्देवी की प्रतिमा लाने की होगी पहल

भोजशाला: सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- विधिसम्मत तरह से वाग्देवी की प्रतिमा लाने की होगी पहल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि फैसले के बाद अब लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा लाने के प्रयास किए जाएंगे …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 16 May 2026 10:29:34 AM (IST)Updated Date: Sat, 16 May 2026 10:29:34 AM (IST)

भोजशाला: सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- विधिसम्मत तरह से वाग्देवी की प्रतिमा लाने की होगी पहल
धार की ऐतिहासिक भोजशाला के निर्णय आने के बाद ज्योर्तिमय मंदिर के बाहर हिंदू समाज का जन सैलाब उमड़ा। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. भोजशाला मामले में प्रमुखजनों की प्रतिक्रिया- निर्णय पर किसने क्या कहा
  2. गौरवशाली विरासत को नई मजबूती मिलेगी : हेमंत खंडेलवाल
  3. निर्णय सांस्कृति चेतना व सनातन परंपरा की पुष्टि: विहिप

नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। यहां स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद को लेकर आए हाई कोर्ट के फैसले के बाद प्रमुखजनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। मामले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि फैसले के बाद अब लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा लाने के प्रयास किए जाएंगे

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि भोजशाला के संबंध में न्यायालय ने माना है कि यहां राजा भोज ने मां वाग्देवी के माध्यम से इस स्थान की महत्ता को स्थापित किया था। ऐसे स्थान के गौरव को पुन: स्थापित करने के लिए विदेश से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रबंध विधिसम्मत किया जाएगा। अयोध्या के देवस्थान के संबंध में न्यायालय के निर्णय के बाद सामाजिक सौहार्द की उत्कृष्ट मिसाल कायम की गई थी। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए भोजशाला के मामले में न्यायालय का निर्णय स्वीकार कर मध्य प्रदेश भाईचारे का परिचय देगा।

गौरवशाली विरासत को नई मजबूती मिलेगी : हेमंत खंडेलवाल

भाजपा के मध्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा है कि भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट का निर्णय भारतीय संस्कृति आस्था और हमारे गौरवशाली विरासत के सम्मान को नई मजबूती प्रदान करने वाला है। मां वाग्देवी की आराधना स्थल के रूप में भोजशाला की मान्यता एवं इसे संरक्षित स्मारक के रूप में संरक्षण मिलना करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान है। हम सभी को न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हुए सामाजिक समरसता सौहार्द और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाना है।

निर्णय सांस्कृति चेतना व सनातन परंपरा की पुष्टि: विहिप

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि भोजशाला का निर्णय भारत की सांस्कृतिक चेतना, सत्य एवं सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण पुष्टि है। यह निर्णय न्यायिक पद्धति का पालन करके हुआ है। कोर्ट ने उस एएसआइ को जांच के लिए नियुक्त किया था, जो इस बारे में भारत की सबसे विशेषज्ञ संस्था है। कोर्ट ने उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों एवं सतत हिंदू उपासना की परंपरा के आधार पर यह माना है कि भोजशाला वाग्देवी का प्राचीन मंदिर एवं संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। लोगों को यह निर्णय स्वीकार करना चाहिए।

अब अपने ही मंदिर में पूजा के लिए लाठियां नहीं खानी पड़ेंगी : आशीष गोयल

याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भोजशाला में ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण नमाज अदा की जाने लगी थी, लेकिन इस सत्य को स्थापित करने के लिए वह और उनके पूर्वज लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। अब हिंदू समाज को अपने ही मंदिर में पूजा करने के लिए लाठियां नहीं खाना पड़ेंगी। यह संविधान की भावना और वास्तविक न्याय की विजय है।

प्रार्थना-पूजा पर फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा: दिग्विजय

इंदौर : वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हाई कोर्ट के निर्णय पर प्रतिक्रिया में कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति है या नहीं। उन्होंने इंदौर में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि भोजशाला एएसआइ द्वारा संरक्षित स्मारक है और इस तरह के स्मारक के अंदर पूजा या प्रार्थना की जा सकती है या नहीं, यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय को करना है। उन्होंने कहा कि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, संभल की शाही जामा मस्जिद और मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से संबंधित मामले पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं।

ओवैसी को उम्मीद सुप्रीम कोर्ट पलटेगा हाई कोर्ट का निर्णय

हैदराबाद। हाई कोर्ट के निर्णय के बाद शुक्रवार को एआइएमआइएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर 700 वर्षों से मस्जिद है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इस परिसर को मंदिर घोषित करने वाले आदेश को पलट देगा। हैदरा बाद में शाम को पत्रकारों से वार्ता में कहा कि भोजशाला समर्पित संपत्ति है। 1935 के धार राज्य राजपत्र में भी उल्लेख है कि यह स्थल एक मस्जिद है। उन्होंने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 में कहा गया है कि किसी भी मस्जिद, मंदिर या अन्य पूजा स्थल का धार्मिक स्वरूप 15 अगस्त, 1947 को जो था, उससे बदला नहीं जा सकता।

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