हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा स्थापत्य और पुरातात्विक साक्ष्यों की हुई। इन्हीं साक्ष्यों ने भोजशाला मामले को निर्णाय …और पढ़ें

HighLights
- स्तंभ, पिलास्टर, शिलालेख, मूर्तियां और वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट बने सबसे बड़े आधार
- इन्हीं साक्ष्यों ने भोजशाला मामले को निर्णायक दिशा दी
- स्तंभ और पिलास्टर बने सबसे बड़ा आधार
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भोजशाला विवाद में वर्षों तक धार्मिक दावे और ऐतिहासिक संदर्भ प्रमुख आधार बने रहे, लेकिन मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा स्थापत्य और पुरातात्विक साक्ष्यों की हुई।
वर्ष 2024 में एएसआइ की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला केवल आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थापत्य संरचना, शिलालेखों और पुरातात्विक अवशेषों की व्याख्या पर केंद्रित हो गया। इन्हीं साक्ष्यों ने भोजशाला मामले को निर्णायक दिशा दी।
स्तंभ और पिलास्टर बने सबसे बड़ा आधार
एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट में परिसर के भीतर 106 स्तंभ और 82 पिलास्टर का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि इनकी स्थापत्य शैली मंदिर संरचना से मेल खाती है। कई स्तंभों पर नक्काशी, आकृतियां और अलंकरण पाए जाने का उल्लेख किया गया, जिन्हें हिंदू स्थापत्य शैली का हिस्सा बताया गया। हिंदू पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों को मूल मंदिर संरचना का सबसे बड़ा प्रमाण बताया। उनका दावा रहा कि बाद में बनी संरचना में पूर्ववर्ती मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया। पिलास्टर वास्तुकला का वह तत्व जो दीवार से जुड़ा एक चपटा, आयताकार स्तंभ होता है।
मूर्तियां और स्थापत्य अवशेष भी अहम
सर्वे रिपोर्ट में मूर्तियों, टूटे अवशेषों और मंदिर शैली की स्थापत्य सामग्री मिलने का भी उल्लेख किया गया। कई आकृतियों और मूर्तियों के क्षतिग्रस्त अवस्था में मिलने की बात कही गई। एएसआइ ने यह भी कहा कि वर्तमान ढांचे में पूर्ववर्ती संरचनाओं के हिस्सों का उपयोग हुआ प्रतीत होता है।
वैज्ञानिक सर्वे ने बदला विमर्श
भोजशाला विवाद लंबे समय तक धार्मिक और राजनीतिक बहस के रूप में देखा जाता रहा लेकिन वैज्ञानिक सर्वे के बाद चर्चा का केंद्र पुरातत्व और स्थापत्य अध्ययन बन गया। कोर्ट में केवल आस्था नहीं, बल्कि तकनीकी रिपोर्ट, संरचनात्मक विश्लेषण और अभिलेखीय साक्ष्यों पर भी विस्तार से सुनवाई हुई।
एएसआई सर्वे में मूर्तियां, स्तंभ और शिलालेख मिले
मार्च से जून, 2024 में एएसआइ द्वारा किए गए सर्वे की 2000 से अधिक पेज की रिपोर्ट में परिसर में मंदिर शैली के अवशेष, मूर्तियां, स्तंभ, शिलालेख और स्थापत्य सामग्री मिलने का उल्लेख है। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्तमान ढांचे में पूर्ववर्ती संरचनाओं के हिस्सों का उपयोग हुआ। सर्वे के दौरान वैज्ञानिक तकनीकों, खोदाई और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार का उपयोग किया गया। 98 दिन तक चले सर्वे में पुरातत्वविद, तकनीकी विशेषज्ञ और संरचना विश्लेषक शामिल रहे। सर्वे टीम का नेतृत्व एएसआइ के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने किया।
एएसआई रिपोर्ट के प्रमुख अंश
- परिसर में परमारकालीन विशाल संरचना होने के संकेत
- 106 स्तंभ और 82 पिलास्टर (अर्ध-स्तंभ) मंदिर संरचनाओं से जुड़े बताए गए। पिलास्टर वास्तुकला का एक तत्व है जो दीवार से जुड़ा एक चपटा, आयताकार स्तंभ होता है।
- संस्कृत और प्राकृत शिलालेख अरबी-फारसी अभिलेखों से पुराने बताए गए
- कई मूर्तियों और आकृतियों के क्षतिग्रस्त अवस्था में मिलने का उल्लेख
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बाद की संरचना जल्दबाजी में बनाई गई प्रतीत होती है।
इसलिए अहम माना गया संस्कृत शिलालेख
रिपोर्ट में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत अभिलेखों का उल्लेख है। इनमें कई अभिलेख नागरी लिपि में बताए गए हैं और उनका संबंध परमार शासकों से जोड़ा गया। अभिलेख अरबी-फारसी लेखों से पुराने हैं।
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