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भारतीय हॉकी की बात होते ही आठ बार की ओलंपिक चैंपियन पुरुष टीम की गौरवशाली विरासत याद आती है, लेकिन महिला हॉकी टीम का विश्व कप सफर संघर्ष, उतार-चढ़ाव और लगातार खुद को साबित करने की कोशिश से भरा रहा है। 1974 में फ्रांस में हुए पहले महिला हॉकी विश्व कप में चौथा स्थान हासिल करने वाली भारतीय टीम 2022 में नौवें स्थान पर रही।
अब तक हुए 15 विश्व कप में भारत केवल आठ बार ही हिस्सा ले सका है। महिला हॉकी विश्व कप के इतिहास में नीदरलैंड सबसे सफल टीम है, जिसने नौ बार खिताब जीता है। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी दो-दो बार चैंपियन बने हैं।


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महिला हॉकी टीम।
– फोटो : X (@narendramodi)
1974: शानदार आगाज, पदक से चूका भारत
- अजिंदर कौर की कप्तानी में भारत ने 1974 के पहले महिला विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने ग्रुप चरण में मजबूत नीदरलैंड को हराकर सभी को चौंका दिया। मैक्सिको और स्पेन को हराने के बाद भारत ग्रुप में शीर्ष पर रहा, लेकिन सेमीफाइनल में अर्जेंटीना से एक गोल से हार गया।
- कांस्य पदक के मुकाबले में पश्चिम जर्मनी ने भारत को 2-0 से हराया। भारत पदक से भले ही चूक गया, लेकिन उसके प्रदर्शन ने देश में महिला हॉकी को नई पहचान दिलाई। नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को हराकर खिताब जीता और पूरे टूर्नामेंट में उसे हराने वाली एकमात्र टीम भारत रही।

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महिला हॉकी टीम।
– फोटो : IANS
1976: आर्थिक मुश्किलों ने रोका रास्ता
पहले विश्व कप में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद भारत 1976 के टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सका। आर्थिक समस्याओं, संस्थागत प्रायोजन की कमी और भारतीय महिला हॉकी संघ के पास पर्याप्त धन नहीं होने के कारण टीम को दूसरे विश्व कप से बाहर रहना पड़ा।
1978: सातवें स्थान पर रहा भारत
रूपा सैनी की कप्तानी में भारत ने 1978 में वापसी की। दस टीमों के टूर्नामेंट में भारत सातवें स्थान पर रहा। पूल ए में चेकोस्लोवाकिया के खिलाफ उसे एकमात्र जीत मिली, जबकि नीदरलैंड और अर्जेंटीना के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। कनाडा के खिलाफ मुकाबला 1-1 से ड्रॉ रहा। क्रॉसओवर में जापान से हारने के बाद भारत ने स्पेन को एक गोल से हराया।

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भारतीय महिला हॉकी टीम
– फोटो : Hockey India
1981-90: लगातार संघर्ष और विश्व कप से दूरी
- 1981 में भारत 12 टीमों के विश्व कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर सका। आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों के कारण महिला टीम की गतिविधियां उपमहाद्वीपीय और आमंत्रण टूर्नामेंटों तक सीमित हो गई थीं।
- 1983 में एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता टीम विश्व कप में लौटी, लेकिन सलमा डिसिल्वा की कप्तानी में ग्रुप चरण के पांच में से चार मैच हार गई। वेल्स के खिलाफ एक ड्रॉ के बाद भारत आखिरी स्थान पर रहा और क्लासीफिकेशन मैच में अर्जेंटीना से हारकर 11वें स्थान पर रहा।
- 1986 में क्वालीफायर में पांचवें स्थान पर रहने के कारण भारत विश्व कप में जगह नहीं बना सका। 1990 में भी टीम क्वालीफायर से आगे नहीं बढ़ सकी और 1994 में मामूली अंतर से छठे स्थान पर रहकर विश्व कप में जगह गंवा दी।

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भारतीय महिला हॉकी टीम
– फोटो : PTI
1998: वापसी, लेकिन आखिरी स्थान
लगातार तीन विश्व कप से बाहर रहने के बाद प्रीतम रानी सिवाच की कप्तानी में भारत 1998 में लौटा। हालांकि पूल ए में टीम अपने सभी पांच मैच हार गई और 12वें व आखिरी स्थान पर रही।
2002: विश्व कप से बाहर, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों में इतिहास
2002 में भारत क्वालीफाइंग दौर में अमेरिका से हारकर विश्व कप में जगह नहीं बना सका। हालांकि उसी साल मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की। यही जीत बाद में शाहरुख खान की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ की प्रेरणा बनी।
2006: सुरिंदर कौर का शानदार प्रदर्शन
2006 के विश्व कप में सुरिंदर कौर ने पांच गोल किए और सर्वाधिक गोल करने वाली खिलाड़ियों की सूची में दूसरे स्थान पर रहीं। हालांकि भारतीय टीम पूल ए में पांच में से चार मैच हारकर और एक ड्रॉ के बाद 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही।
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