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24 वर्षीय मार्क वेलनेस एप पर बार-बार सवाल दिखता है,‘आपका एंग्जायटी लेवल क्या है…?’ अक्सर उनका जवाब ‘हाई’ ही होता है। यह उस विरोधाभास को दर्शाता है, जहां दुनियाभर में मानसिक सेहत को लेकर जागरूकता, पाठ्यक्रम, कंपनियों के ‘मेंटल हेल्थ डे’ व हजारों वेलनेस एप मौजूद हैं, फिर भी मानसिक तनाव बढ़ रहा है। सोशल मीडिया के कारण लोग दुख, उदासी जैसी भावनाओं को भी मानसिक बीमारी मान बैठते हैं। मार्क भी इसी स्थिति से जूझ रहे हैं। एक्सपर्ट इसे ‘कांसेप्ट क्रीप’ कहते हैं। यानी हद से ज्यादा मानसिक सेहत पर ध्यान देना भी मानसिक रूप से परेशान सकता है, जानिए इससे कैसे बच सकते हैं… वास्तविक दुनिया से जुड़ें जब दिमाग जरूरत से ज्यादा सोच-विचार में उलझ जाता है तो खुद को वर्तमान से जोड़ना सबसे कारगर उपाय है। इसे 5-4-3-2-1 तकनीक भी कहते हैं। जब बहुत सारे विचार चल रहे हों, तो आसपास की चीजों पर ध्यान दें। 5 चीजें देखें, 4 चीजों को छूकर महसूस करें, 3 आवाजें सुनें, 2 खुशबू या गंध पहचानें और 1 स्वाद पर ध्यान दें। इससे ध्यान परेशान करने वाले विचारों से हटकर वर्तमान पल में आ जाता है। अमेरिकी थिंक टैंक ‘ह्यूमन फ्लरिशिंग लैब’ के एक्सपर्ट डॉ. क्ले रूटलेज के अनुसार यह अभ्यास दिमाग को शांत करता है, घबराहट कम करता है और व्यक्ति को वास्तविक दुनिया से दोबारा जुड़ने में मदद करता है। विचारों को गुजरने दें मन में आने वाला हर विचार सच नहीं होता। मसलन, अगर किसी काम के दबाव में लगे कि पूरी तरह बर्नआउट हो गए हैं तो तुरंत उस पर यकीन करने के बजाय सोचें,‘यह सिर्फ मेरे मन का विचार है।’ इससे आप अपनी भावनाओं व विचारों को थोड़ी दूरी से देख पाते हैं। मनोवैज्ञानिक निकोलस हसलम कहते हैं,‘जब हम हर विचार को हकीकत मानना छोड़ देते हैं, तो चिंता का असर कम हो जाता है। परोपकार के काम यह तनाव घटाने का आसान तरीका है। रोज सिर्फ 5 से 10 मिनट किसी और की मदद के लिए निकालें। जैसे- सहकर्मी की तारीफ, जरूरतमंद की मदद या पक्षियों के लिए पानी रखना। डॉ. रूटलेज कहते हैं,‘जब हम दूसरों के लिए कुछ अच्छा करते हैं, तो ध्यान अपनी मुश्किलों से हटता है, मन हल्का होता है और अकेलेपन की भावना भी कम होने लगती है। चिंता का समय तय करें मनोवैज्ञानिक जेनिफर चीवेंस कहती हैं,‘पूरे दिन चिंता करने के बजाय उसके लिए निश्चित समय रखा जाता है। उदाहरण के लिए, दिन में कोई परेशान करने वाला विचार आए तो उसे लिख लें और खुद से कहें,‘इस पर मैं शाम 6 से 6:15 बजे तक सोचूंगा।’ इससे दिमाग हर समय चिंता में नहीं उलझता, ध्यान काम पर बना रहता है और मानसिक तनाव भी कम महसूस होता है।’ विस्मय का अनुभव रोज कुछ समय प्रकृति या खूबसूरत चीज को ध्यान से देखें। मनोवैज्ञानिक डाकर केल्टनर कहते हैं,‘किसी बड़े पेड़, ढलते सूरज, बहती नदी या इमारत को निहारें व उसकी विशालता को महसूस करें। इससे ध्यान अपनी चिंताओं से हटकर दुनिया की खूबसूरती पर जाता है। ऐसे अनुभव मन को शांत करते हैं और व्यक्ति को अलग तरह से सोचने में मदद करते हैं।’
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