युवाओं में बढ़ा 'बुक-फैशन' का क्रेज:एक्सपर्ट बोले-किताबें पढ़ना सिर्फ दिखावा न बने; बैग्स और कपड़ों तक पहुंचा नया ट्रेंड

युवाओं में बढ़ा 'बुक-फैशन' का क्रेज:एक्सपर्ट बोले-किताबें पढ़ना सिर्फ दिखावा न बने; बैग्स और कपड़ों तक पहुंचा नया ट्रेंड




किताबें पढ़ना अब सिर्फ शौक नहीं बल्कि नया फैशन और चलन बन गया है। दुनियाभर में फेमस कपड़े और फैशन के ब्रांड पुरानी और मशहूर किताबों के नाम पर अपने प्रोडक्ट्स बेच रहे हैं। जैसे, मशहूर ब्रांड डायर ने अपने बैग पर कुछ खास पुरानी किताबों के कवर छाप दिए हैं। दूसरे ब्रांड कोच ने पेंगुइन कंपनी के साथ मिलकर बैग में लटकाने वाले छोटे-छोटे शोपीस बनाए हैं, जिनमें छोटी-छोटी असली किताबें हैं जिन्हें पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा, मियू मियू और शनेल जैसे ब्रांड अपने खुद के बुक क्लब चलाते हैं। मामले में लेखक व कंटेंट क्रिएटर सिहाम नाइक का कहना है आज के युवाओं के लिए अपना घर खरीदना मुश्किल हो गया है, इसलिए वे अपनी पसंद की किताबें और खास चीजें खरीदकर अपनी पहचान दुनिया के सामने रखना चाहते हैं। इंस्टाग्राम पर किताबों को लेकर कंटेंट बनाने वाली सोल नोया का कहना है कि पहले किताबें पढ़ने वालों को बोरिंग समझा जाता था, अब हालात बेहतर हैं। उनका कहना है कि पढ़ने से हमारी सोचने की ताकत और दूसरों की भावनाएं समझने की क्षमता बढ़ती है, इसलिए पढ़ना अच्छी बात है। हालांकि, किताबों को केवल सुंदर दिखाने या सजावट की चीज बना देने से सारा जोर सिर्फ चीजें खरीदने पर रह जाता है, और यह चुपके से अपनी अमीरी दिखाने का जरिया बन जाता है क्योंकि बहुत सारी महंगी किताबें घर में सजाने का मतलब है कि आपके पास उन्हें खरीदने के पैसे हैं और घर में जगह भी है। कुछ सोशल मीडिया क्रिएटर्स का कहना है कि मोबाइल फोन छोड़कर हाथ में असली किताब या कागज वाला माध्यम चुनना गर्व की बात होनी चाहिए, और लोग इसे बहुत पसंद भी कर रहे हैं। सिर्फ यही नहीं, लिखे हुए शब्दों से जुड़ने पर पढ़ने का असली आनंद मिलता है। रोमांस व फैंटेसी वाली किताबों भी लोकप्रिय हो रही है। ऐसे में अगर किताबें पढ़ना ट्रेंडी बन जाए, तो इससे नए लोग भी पढ़ाई से जुड़ेंगे, जो कि एक अच्छी बात है। सेलिब्रिटी बुक क्लब से बढ़ा क्रेज, कंटेंट से ज्यादा कवर पर फोकस मशहूर हस्तियों और कलाकारों के बुक क्लब भी इस चलन को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। वे ऐसे लेखकों की किताबें शेयर करते हैं जिन्हें बड़े मंच की जरूरत होती है। लेकिन सिहाम नाइक मुताबिक, इससे यह गलत संदेश भी जाता है कि इंटरनेट पर वही चीज दिखाने या शेयर करने लायक है जो देखने में बहुत सुंदर लगे। यानी किताब के अंदर क्या लिखा है, उसे समझने के बजाय पढ़ने वाले की शक्ल-सूरत या रूप-रंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है। इससे समाज में ये भ्रम हो सकता है कि इस फैशन का हिस्सा बनने के लिए सुंदर-आकर्षक होना जरूरी है।



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