बाबा रामदेव ने बुधवार को बताया कि कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के साथ चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि बुधवार को उनकी बृजभूषण से मुलाकात हुई। रामदेव बाबा ने कहा कि कुछ सुनी-सुनाई बातों और वीडियो की वजह से बृजभूषण के मन में गलतफहमी पैदा हो गई थी, लेकिन मुलाकात के दौरान यह गलतफहमी दूर हो गई।
रामदेव बाबा ने क्या-क्या कहा?
रामदेव ने बताया कि मुलाकात के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने उन्हें प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि बृजभूषण ने उनसे कहा कि वे संत और सनातन का हमेशा सम्मान करते हैं और देश के लिए रामदेव के काम का भी सम्मान करते हैं। रामदेव ने इसके लिए बृजभूषण का धन्यवाद किया।
बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि वह किसी विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि साधु बनने का उनका उद्देश्य भी यही है कि विवादों को बढ़ाने के बजाय उन्हें खत्म किया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों भी एक अन्य विवाद सामने आया था, जिसे उन्होंने वहीं खत्म कर दिया था। उन्होंने कहा कि उनका जीवन देशसेवा के बड़े उद्देश्य के लिए है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई थी?
यह विवाद बृजभूषण शरण सिंह के बहराइच में दिए गए एक बयान के बाद बढ़ा था। उन्होंने बाबा रामदेव पर मिलावटी सामान बनाने को लेकर टिप्पणी की थी। बृजभूषण ने कहा था कि मिलावटी सामान बनाने के मामले में रामदेव सभी के सम्राट हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि समस्या केवल पतंजलि के घी तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में नकली पनीर और चौराहों पर नकली खाने के सामान की दुकानें खुली हैं। इसके बाद पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि दावा भी दायर किया था।
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पतंजलि घी को लेकर बाबा ने क्या कहा?
विवाद खत्म होने की जानकारी देने के दौरान रामदेव ने पतंजलि के उत्पादों पर उठे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पतंजलि का गाय का घी नकली नहीं है और पतंजलि की कोई दवाई नकली नहीं है। उन्होंने अपने संन्यास को लेकर भी कहा कि उन्होंने संन्यास नशे के लिए नहीं लिया है और वह प्रमाणिकता के साथ संन्यास का जीवन जीते हैं।
पहले भी विवादों में रहा है बाबा का पतंजलि
यह पहली बार नहीं है कि पतंजलि विवादों में रहा हो। इससे पहले पतंजलि आयुर्वेद के विज्ञापनों को लेकर 2023-24 में सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा था। आरोप था कि कंपनी ने अपनी कुछ आयुर्वेदिक दवाओं को गंभीर बीमारियों के इलाज का स्थायी समाधान बताने वाले दावे किए। अदालत ने ऐसे विज्ञापनों पर रोक से जुड़ा आदेश दिया था। इसके बावजूद विज्ञापन जारी रहने पर बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को अदालत की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। बाद में दोनों ने बिना शर्त माफी मांगते हुए ऐसे विज्ञापन दोबारा नहीं करने का आश्वासन दिया।
पतंजलि के घी को लेकर भी सामने आ चुका है गुणवत्ता का मामला
पतंजलि के गाय के घी को लेकर भी पहले गुणवत्ता संबंधी विवाद सामने आया था। 2016 में हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच से जुड़े एक मामले में पतंजलि के गाय के घी के नमूने को प्रयोगशाला रिपोर्ट में मानकों के अनुरूप नहीं बताया गया था। हालांकि, यह पुराना मामला है।
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