रेगिस्तान में ‘नभ रक्षक’ का ट्रायल।
भारतीय सेना के लिए ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में इंदौर के स्टार्टअप्स एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। उनके द्वारा बनाए गए ‘नभ रक्षक’ (Nabhrakshak) ड्रोन ने शनिवार को रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित बेहद चुनौतीपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) जैमिंग ट्रा
.
इस परीक्षण में ड्रोन ने स्टेज-1 और स्टेज-2 दोनों चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसमें देशभर के 180 स्टार्टअप्स थे।
भारी इलेक्ट्रॉनिक जामिंग के बीच भी उड़ान जारी
अभिषेक मिश्रा (CEO, पिसार्व कंपनी ) ने बताया कि यह परीक्षण सेना की साउथ वेस्टर्न कमांड की ओर से रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित किया गया था। परीक्षण के दौरान ऐसा वातावरण तैयार किया गया, जहां इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के कारण ड्रोन के संचार और संचालन में बाधा उत्पन्न होने की चुनौती थी ऐसे चुनौतीपूर्ण और ‘कंटेस्टेड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एनवायरनमेंट’ में भी ‘नभ रक्षक’ ने सहजता से उड़ान जारी रखी और निर्धारित परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

‘नभ रक्षक’ का परीक्षण करते सेना के अधिकारी।
जैमिंग के बावजूद मिशन पूरा करने की क्षमता पर फोकस
कंपनी ऐसे ड्रोन डेवलप कर रही है, जिन्हें अत्यधिक इलेक्ट्रॉनिक जामिंग वाले वातावरण में भी ऑपरेशनल बनाए रखा जा सके। इन ड्रोन का उद्देश्य जैमिंग का सामना करते हुए अपने नियंत्रण और संचालन को बनाए रखना तथा दिए गए मिशन को पूरा करना है। कंपनी ने इसे देश में विकसित ड्रोन तकनीक और स्वदेशी इंजीनियरिंग क्षमताओं की महत्वपूर्ण पुष्टि बताया है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में योगदान
कंपनी के दुर्गेश शुक्ला और रोशनी शुक्ला ने बताया कि नभ रक्षक की यह उपलब्धि कंपनी के लिए गर्व का क्षण है। कठिन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर परिस्थितियों में ड्रोन का सफल प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारत में विकसित तकनीक लगातार अधिक चुनौतीपूर्ण सैन्य जरूरतों के अनुरूप तैयार हो रही है।
लक्ष्य अलग-अलग श्रेणियों के ऐसे ड्रोन विकसित करना है, जो घने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वातावरण में भी काम कर सकें, जैमिंग का प्रतिरोध कर सकें और अपने निर्धारित मिशन को पूरा कर सकें। इसे “भारत को और मजबूत तथा अधिक सक्षम बनाने में अपना योगदान” बताया है।
क्या है EW जैमिंग?
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) में इलेक्ट्रॉनिक और रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित प्रणालियों को प्रभावित करने या उनसे मुकाबला करने की तकनीकें शामिल होती हैं। ड्रोन के लिए ऐसे वातावरण में संचार, नेविगेशन और नियंत्रण बनाए रखना बड़ी तकनीकी चुनौती होती है।
ऐसे में जैमिंग के बावजूद सफलतापूर्वक उड़ान भरना ड्रोन की क्षमता का महत्वपूर्ण परीक्षण माना जाता है। ऐसे में यह ड्रोन दुश्मन देशों के उस क्षेत्र में लगाए गए जैमर को भी बिना बाधा के पार कर जाता है।
Source link
#रगसतन #म #भ #जमग #फल.. #इदर #क #सटरटअपस #क #नभ #रकषक #डरन #न #पस #कय #सन #क #कठन #टरयल #Indore #News


