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एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने आंख और मस्तिष्क के बीच गहरे संबंधों पर महत्वपूर्ण अध्ययन करते हुए नई दिशा दिखाई है। प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका CNS Neurological Disorders – Drug Targets में प्रकाशित इस शोध में सामने आया है कि आंखों की रेटिना मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत दे सकती है।
अध्ययन के अनुसार रेटिना, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का ही विस्तार है, मस्तिष्क में होने वाले रोगजनक परिवर्तनों को समझने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि कई बार न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखने से पहले ही रेटिना में बदलाव नजर आने लगते हैं। तीन बड़ी बीमारियों में समान तंत्र शोध में उम्र से संबंधित मैकुलर डिजनरेशन (AMD), अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों में समान न्यूरोइम्यून तंत्र पाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आंख और मस्तिष्क के रोग आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। प्रोटीन और सूजन का साझा प्रभाव शोधकर्ताओं ने पाया कि अल्जाइमर से जुड़ा एमिलॉयड-बीटा प्रोटीन, आंखों में बनने वाले ड्रूसेन का भी हिस्सा है। इसके अलावा दीर्घकालिक सूजन, माइक्रोग्लिया और म्यूलर ग्लिया की असामान्य सक्रियता तथा रक्त-मस्तिष्क और रक्त-रेटिनल अवरोधों की क्षति जैसे कारक भी समान रूप से मौजूद हैं। समय से पहले पहचान की बढ़ी संभावना विशेषज्ञों का मानना है कि रेटिना में इन परिवर्तनों की पहचान कर भविष्य में अल्जाइमर जैसी बीमारियों का जोखिम कई वर्ष पहले ही पता लगाया जा सकता है। इससे समय रहते इलाज शुरू करने का रास्ता आसान होगा। इलाज के नए रास्ते खुलने के संकेत शोध में यह भी संकेत मिला है कि वर्तमान में AMD के इलाज में इस्तेमाल हो रही पूरक-विरोधी, अपोप्टोटिक-विरोधी और VEGF-विरोधी रणनीतियां भविष्य में न्यूरोप्रोटेक्टिव उपचार विकसित करने में मददगार साबित हो सकती हैं।
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