लाइक, मैसेज और फिर खेल:भारत में 24 घंटे शिकार तलाश रही Isi, हनी ट्रैप से बिछाई जा रही है जासूसी की बिसात? – Isi Social Media Network Honey Trap Indian Influencers Security Threat

लाइक, मैसेज और फिर खेल:भारत में 24 घंटे शिकार तलाश रही Isi, हनी ट्रैप से बिछाई जा रही है जासूसी की बिसात? – Isi Social Media Network Honey Trap Indian Influencers Security Threat

एक लाइक, एक मैसेज और फिर दोस्ती…धीरे-धीरे बातचीत बढ़ती है। भरोसा बनता है। पैसे का लालच आता है। कहीं लोकप्रियता का सपना दिखाया जाता है। कहीं किसी खूबसूरत पहचान के पीछे छिपा हनी ट्रैप सामने आता है। और फिर शुरू होता है असली खेल।

एक खुफिया रिपोर्ट में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई सोशल मीडिया को भारत के खिलाफ बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। मकसद सिर्फ जानकारी जुटाना नहीं है। लोगों को अपने जाल में फंसाना भी है। भारत के खिलाफ माहौल बनाना भी है। और जरूरत पड़ने पर आतंकी साजिशों को आगे बढ़ाना भी। खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे अभियान का दायरा इतना बड़ा है कि आईएसआई का नेटवर्क चौबीसों घंटे सक्रिय रहता है।

सबसे आसान निशाना कौन है?


  • वे लोग, जो सोशल मीडिया पर पहचान चाहते हैं।

  • ज्यादा लाइक चाहते हैं।

  • ज्यादा व्यूज चाहते हैं।

  • और जल्दी मशहूर होना चाहते हैं।

इन्फ्लुएंसर तक कैसे पहुंच रही है आईएसआई?

खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। इन संगठनों से जुड़े कुछ लोगों को खास काम दिया गया है। इन्फ्लुएंसर तक पहुंचो। सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों से दोस्ती करो। उनकी कमजोरियां पहचानो। फिर उन्हें अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करो। अधिकारियों के अनुसार, कई लोगों को लाइक और पैसे का लालच देकर प्रभावित किया जाता है। मकसद उन्हें पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल करना है। भारतीय एजेंसियां पहले भी इन्फ्लुएंसर से जुड़े कई नेटवर्क का पर्दाफाश कर चुकी हैं। लेकिन अब चिंता एक नए मोर्चे को लेकर है। वो है हनी ट्रैप। यानी पहले भरोसा, फिर भावनात्मक जुड़ाव और उसके बाद संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश।

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भर्ती से लेकर भ्रामक प्रचार तक: एक साथ तीन मोर्चों पर कैसे काम कर रही है आईएसआई?

खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर आईएसआई की रणनीति कई परतों में काम कर रही है। पहला निशाना हैं इन्फ्लुएंसर। ऐसे लोग, जिनके हजारों या लाखों लोग उन्हें देखते और सुनते हैं। आईएसआई की कोशिश ऐसे लोगों के जरिए पाकिस्तान के पक्ष में नैरेटिव तैयार करने की है। दूसरा निशाना हैं वे लोग, जिनके पास केंद्र सरकार या सशस्त्र बलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हो सकती है।

तीसरा मोर्चा है भ्रामक प्रचार। फर्जी नैरेटिव बनाना। झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाना। भारत के खिलाफ माहौल तैयार करना। एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय एजेंसियां ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में सक्षम हैं। असली चुनौती इसका दायरा है। यह किसी एक व्यक्ति का खेल नहीं है। इसके पीछे पूरा तंत्र काम कर रहा है।

भारत में कहां-कहां सक्रिय हैं मॉड्यूल?

अधिकारियों के मुताबिक, आईएसआई ने भारत में भर्ती के लिए लोगों की तलाश करने का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। इसका काम चौबीसों घंटे चलता है। पाकिस्तान में भर्ती और लोगों की तलाश के लिए केंद्र बनाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, भारत में भी अलग-अलग मॉड्यूल सक्रिय हैं। मकसद साफ है। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना। एजेंट तैयार करना और लगातार जानकारी हासिल करना।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश में सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए मॉड्यूल बनाए गए हैं। खुफिया अधिकारियों का मानना है कि आईएसआई ने सोशल मीडिया की एक बड़ी कमजोरी को अच्छी तरह समझ लिया है। लोकप्रियता की भूख। पैसे की चाह। रील पर ज्यादा व्यूज पाने की होड़। यही वह जगह है, जहां कई लोग सावधानी छोड़ देते हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, ज्यादा लाइक और व्यूज की दौड़ में कुछ लोग यह नहीं सोचते कि उनके कदमों का राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या असर हो सकता है। आईएसआई इसी कमजोरी का भरपूर फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।

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सेना के अधिकारियों को कैसे बनाया जाता है हनी ट्रैप का निशाना?

यह खेल अचानक शुरू नहीं होता। और न ही एक दिन में खत्म होता है। सशस्त्र बलों से जुड़े किसी व्यक्ति को निशाना बनाने से पहले उसके बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई जाती है। उसकी आदतें देखी जाती हैं। कमजोरियां समझी जाती हैं। फिर संपर्क किया जाता है। बातचीत शुरू होती है।

धीरे-धीरे भरोसा बनाया जाता है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह बातचीत कई महीनों तक चल सकती है। असली जाल तब बिछाया जाता है, जब एजेंट को लगता है कि सामने वाला व्यक्ति उसके भरोसे में आ चुका है। भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर एम एस सभरवाल से जुड़े मामले की जांच में भी हनी ट्रैप के कथित तरीके की जानकारी सामने आई। जांच में पाया गया कि उन्होंने कथित तौर पर निजी उपकरण का इस्तेमाल कर अभ्यास क्षेत्र के भीतर ड्रोन की परीक्षण फायरिंग की रिकॉर्डिंग की थी। आईएसआई एजेंट के साथ उनके एक संवाद में ड्रोन के प्रक्षेपण और उसके लक्ष्य तक पहुंचने के बीच के समय का भी जिक्र था।

यही वह जानकारी है, जिस तक पहुंचने के लिए ऐसे नेटवर्क लंबे समय तक काम करते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों तेज हुई गतिविधियां?

खुफिया अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद आईएसआई की गतिविधियां और तेज हो गईं। भारतीय सशस्त्र बलों की इस कार्रवाई ने पाकिस्तान के परमाणु दावों की पोल खोल दी। साथ ही इस्लामाबाद को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। इसके बाद आईएसआई ने भारतीय व्यवस्था और खासतौर पर सशस्त्र बलों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज कर दीं। अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए सोशल मीडिया सबसे आसान माध्यम बनकर सामने आया।

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