
आपको बता दें कि आगम तंत्र पर आधारित ये मंदिर का हर कोण खास विशेषता लिए हैं। इससे बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर मुक्तिधाम है। यह मातारानी का प्रताप ही है कि उनकी काली प्रतिमा ममत्व से भरपूर, मनमोहक है। मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे चौथी पीढ़ी के पुजारी राहुल ने बताया कि उनके बाबा स्व. ताराचंद ने मातारानी की सेवा की। उनके बाद पुत्र इन्दरचन्द्र यादव, फिर कैलाशचंद्र और अब वह खुद राहुल यादव मंदिर की देखरेख कर रहे है। राहुल बताते हैं कि पहले मंदिर छोटा था जिसमें लाल पत्थर की काली प्रतिमा थी। यहीं से मुक्तिधाम का रास्ता जाता था। साल 1964-65 में कालका माता की बड़ी प्रतिमा जयपुर से बुलवाई गई थी। इस प्रतिमा की खासियत है यह भक्त की इच्छानुरूप दर्शन देती है। यहां नि:संतान माताओं की गोद भरने के लिए मंगलवार व शनिवार को प्रार्थना की जाती है। इसमें यजमान को सवा किलो चावल, दो नारियल, एक मीटर लाल कपड़ा एवं 250 ग्राम पताशा लेकर मंदिर आना होता है।
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