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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकारी कस्टडी (तिजोरी) से असली सोने के आभूषण गायब कर उनकी जगह नकली जेवर रखने के दशकों पुराने गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस जी.एस. सिंह अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच ने सीआईडी को मामले की आगे जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि पूरी साजिश के पीछे छिपे असली दोषियों का पता लगाया जा सके। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामले के एक आरोपी के निचली अदालत से दोषमुक्त (बरी) हो जाने का यह अर्थ नहीं है कि सरकारी तिजोरी में रखे आभूषणों की अदला-बदली करने वाले असली आरोपियों की तलाश बंद कर दी जाए। अधिकारियों ने कोर्ट से छिपाई एफआईआर और ट्रायल की जानकारी सुनवाई के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जब यह रिट अपील हाईकोर्ट में लंबित थी, तब जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों और ओआईसी (OIC) ने कोर्ट को यह महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी कि इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी थी और निचली अदालत में ट्रायल चल रहा था। इतना ही नहीं, वर्ष 2019 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी भी कर दिया था। इसके बावजूद मामला कई बार सूचीबद्ध होने पर भी सरकारी पक्ष ने हाईकोर्ट को इसकी जानकारी नहीं दी। इस लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। सीआईडी करेगी असली दोषियों की तलाश हाईकोर्ट ने सरकारी खजाने और न्यायालय की अभिरक्षा (कस्टडी) में रखे जेवरातों की अदला-बदली को बेहद गंभीर अपराध माना है। कोर्ट ने कहा कि जब तक सरकारी कस्टडी से असली सोना गायब करने वाले वास्तविक दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा नहीं दिलाई जाती, तब तक जांच बंद नहीं की जा सकती। सीआईडी को नए साक्ष्यों के आधार पर गहन जांच कर पूरे षड्यंत्र का खुलासा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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