सात माह बाद फिर अस्तित्व में आई स्थानीय अखाड़ा परिषद:  अध्यक्ष बोले- मनमुटाव खत्म, अब मिलकर 2028 सिंहस्थ को दिव्य-भव्य बनाएंगे – Ujjain News

सात माह बाद फिर अस्तित्व में आई स्थानीय अखाड़ा परिषद: अध्यक्ष बोले- मनमुटाव खत्म, अब मिलकर 2028 सिंहस्थ को दिव्य-भव्य बनाएंगे – Ujjain News

सात माह बाद फिर अस्तित्व में आई स्थानीय अखाड़ा परिषद:  अध्यक्ष बोले- मनमुटाव खत्म, अब मिलकर 2028 सिंहस्थ को दिव्य-भव्य बनाएंगे – Ujjain News


करीब सात महीने पहले भंग हुई उज्जैन स्थानीय अखाड़ा परिषद का बुधवार को पुनर्गठन कर दिया गया। निरंजनी अखाड़े में आयोजित बैठक में शैव, वैष्णव, उदासीन, नाथ और अन्य संप्रदायों के संत-महंत एक मंच पर आए और परिषद को फिर से सक्रिय करने का निर्णय लिया। संतों ने यह भी तय किया कि वर्ष 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों और प्रशासन से जुड़े सभी विषयों पर अब संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। इस बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रवींद्र पुरी महाराज, निर्मोही अखाड़े के श्रीमहंत मदन मोहन दास महाराज सहित सभी प्रमुख अखाड़ों के संत-महंत मौजूद रहे। बैठक में उज्जैन और नासिक कुंभ से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई तथा सभी ने एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। सात महीने पहले मतभेद के चलते परिषद हुई थी भंग 30 नवंबर 2025 को दत्त अखाड़े में आयोजित आपात बैठक में स्थानीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने इस्तीफा देकर परिषद को भंग कर दिया था। इसके बाद शैव और वैष्णव संप्रदायों के बीच मतभेद गहरा गए थे। वैष्णव अखाड़ों ने अलग होकर ‘रामादल अखाड़ा परिषद’ के गठन की घोषणा कर दी थी और सिंहस्थ से जुड़े मामलों में अलग से प्रशासन से चर्चा करने की बात कही थी। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी था। मंगलवार को निर्मोही अखाड़े की ओर से श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज के नेतृत्व का समर्थन किए जाने के बाद बुधवार को सभी संत एक साथ बैठे और परिषद को पुनर्जीवित करने पर सहमति बन गई। प्रशासन को देंगे संयुक्त सुझाव स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज ने कहा कि परिषद को पुनर्जीवित कर दिया गया है और पूर्व के सभी पदाधिकारी पहले की तरह अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे। अब शैव, वैष्णव, उदासीन, नाथ सहित सभी संप्रदाय मिलकर प्रशासन के साथ समन्वय करेंगे और सिंहस्थ-2028 के लिए आवश्यक सुझाव संयुक्त रूप से देंगे। उन्होंने कहा कि परिषद को दोबारा सक्रिय करने का उद्देश्य संत समाज की एकता बनाए रखना और सिंहस्थ की तैयारियों में बेहतर समन्वय स्थापित करना है। रवींद्र पुरी बोले- अब कोई मनमुटाव नहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि सभी संतों के बीच जो भी मतभेद थे, वे अब समाप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य 2028 का सिंहस्थ कुंभ दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाना है। सभी अखाड़े एक साथ मिलकर कार्य करेंगे और शासन-प्रशासन को आवश्यक सहयोग देंगे।” बैठक में ये संत-महंत रहे मौजूद बैठक में महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज, महंत भगवान दास महाराज, जूना अखाड़े के राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत रामेश्वर गिरी महाराज, महानिर्वाणी अखाड़े के महंत श्याम गिरी महाराज, राधे-राधे बाबा, आनंद अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकरानंद सरस्वती महाराज (नासिक), महामंडलेश्वर शांतिस्वरूपानंद गिरी महाराज, महामंडलेश्वर भगवान बापू, दिगंबर अखाड़े के महंत रामचंद्र दास महाराज, निर्वाणी अखाड़े के महंत दिग्विजय दास महाराज, निर्मोही अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीताराम दास महाराज, महंत महावीरनाथ महाराज, भगवान दास महाराज, सारंगी महाराज, सेवागिरी महाराज, कृष्णानंद ब्रह्मचारी महाराज, विशाल दास तथा परिषद के प्रबंधक डॉ. गोविंद सोलंकी सहित बड़ी संख्या में संत-महंत उपस्थित रहे।

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