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एमवाय अस्पताल में 9 मई को 128 स्लाइस सीटी स्कैन और 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीन शुरू होने से मरीजों को राहत मिली है, लेकिन 15 दिन बाद भी कंट्रास्ट एमआरआई सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। फिलहाल प्रतिदिन 15 एमआरआई और 15 सीटी स्कैन जांच हो रही है। न्यूरोलॉजी, ब्रेन ट्यूमर, कैंसर और स्पाइन से जुड़े ज्यादातर मरीजों को कंट्रास्ट एमआरआई की जरूरत पड़ती है। सुविधा उपलब्ध नहीं होने से बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को निजी सेंटर का सहारा लेना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में कम खर्च में जांच की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को बाहर 5 से 8 हजार रुपए तक खर्च करना पड़ रहे हैं। एमवाय में सामान्य एमआरआई 2000 से 2500 रुपए और सीटी स्कैन 1000 से 1500 रुपए तक में हो रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अंतर बड़ी परेशानी बन रहा है। कई मरीज जांच टाल रहे हैं। उधर, सुपर स्पेशिएलिटी में एमआरआई मशीन लगाने का प्रस्ताव वर्ष 2021 में भेजा था। अस्पताल में जगह भी चिह्नित की गई। इसके बाद भी प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका। अब तक न बजट स्वीकृत हुआ न ही मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू हो पाई। संभाग से रेफर होकर आने वाले गंभीर मरीजों के लिए सुपर स्पेशिएलिटी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। कंट्रास्ट एमआरआई में ट्यूमर, संक्रमण स्पष्ट दिखाई देता है रेडियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अमन गुप्ता के मुताबिक, सामान्य एमआरआई में बिना किसी दवा के स्कैन किया जाता है। इससे शरीर के अंगों की सामान्य तस्वीर मिलती है। वहीं, कंट्रास्ट एमआरआई में मरीज की नस के जरिये विशेष दवा दी जाती है। यह दवा ट्यूमर, संक्रमण या संदिग्ध हिस्सों को ज्यादा स्पष्ट दिखाने में मदद करती है। इससे बीमारी की पहचान अधिक सटीक तरीके से हो पाती है और जांच की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। न्यूरो और ब्रेन ट्यूमर मरीजों में यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। मांग भेज दी गई है : अधीक्षक एमवाय अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने बताया, फिलहाल सामान्य एमआरआई और सीटी स्कैन जांच नियमित की जा रही हैं। कंट्रास्ट एमआरआई शुरू करने के लिए जरूरी दवा और प्रेशर इंजेक्टर की मांग भेज दी गई है। सामग्री उपलब्ध होते ही यह सुविधा भी शुरू कर दी जाएगी। बर्न यूनिट का एसी बंद, मरीज कूलर के भरोसे एमवाय अस्पताल की बर्न यूनिट में भर्ती गंभीर मरीजों को बार-बार एसी बंद होने से गर्मी में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक सप्ताह से बर्न यूनिट का सेंट्रल एसी आधे हिस्से में बंद हो गया। ऐसे में बाकी हिस्से में गंभीर मरीजों के लिए दो जंबो कूलर लगाकर काम चलाया जा रहा है। एसी सुधारने के लिए प्रबंधन पीआईयू को एक साल में 6 से ज्यादा पत्र लिख चुका है। 15 मई 2026 को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे गए तीसरे स्मरण पत्र में 16 मई 2025 और 16 जुलाई 2025 को भेजे गए पुराने पत्रों का भी उल्लेख है। अस्पताल प्रबंधन लगातार लिखित रूप से बता रहा था कि बर्न यूनिट की एसी व्यवस्था प्रभावित हो रही है और तकनीकी सहयोग जरूरी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया। गंभीर मरीजों में संक्रमण का खतरा एमवाय अस्पताल की बर्न यूनिट में अभी भी 75 से 90 प्रतिशत तक झुलसे दो गंभीर मरीज भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बर्न मरीजों के लिए नियंत्रित तापमान बेहद जरूरी होता है, क्योंकि अधिक गर्मी से संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। फिलहाल मरीजों के इलाज के बीच स्टाफ को भी गर्मी में काम करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल अपने स्तर पर मेंटेनेंस करवाकर व्यवस्था संभालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए पीआईयू से तकनीकी सहयोग जरूरी है। दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए, जिससे मेंटेनेंस अनुबंध नहीं हो सका एमवायएच अधीक्षक कार्यालय ने पहली बार 15 मई 2025 को कार्यपालन यंत्री, पीआईयू इंदौर को एसी के लिए पत्र लिखा था। इसमें स्पष्ट था कि बर्न यूनिट में स्थापित सेंट्रल एचवी एसी एयर कंडीशनर सिस्टम की जरूरी तकनीकी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके कारण वार्षिक मेंटेनेंस अनुबंध नहीं हो सका और एसी बार-बार बंद हो रहे हैं। सीएम के दौरे की सूचना पर अस्थायी रूप से चालू हुए थे एसी देवास पटाखा फैक्टरी हादसे के बाद मुख्यमंत्री के बर्न यूनिट में आने की सूचना पर कलेक्टर के निर्देश के बाद एसी अस्थायी रूप से चालू करवाए गए थे, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण सेंट्रल एसी पूरी तरह काम नहीं कर रहे और रविवार रात फिर बंद पड़ गए।
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