सोनम वांगचुक का वज़न 8.5 किलो घटा, कॉकरोच जनता पार्टी अब क्या करने जा रही है?

सोनम वांगचुक का वज़न 8.5 किलो घटा, कॉकरोच जनता पार्टी अब क्या करने जा रही है?

सोनम वांगचुक

इमेज स्रोत, Getty Images

“मैं बाहर से कमज़ोर हूं, लेकिन अंदर से मजबूत हूं.”

दिल्ली में पिछले 17 दिनों से सरकार के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने सोमवार को बीबीसी से बातचीत में यह बात कही.

उनकी बिगड़ती सेहत ने समर्थकों की चिंता बढ़ा दी है. हज़ारों लोग उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं.

लेकिन 59 वर्षीय वांगचुक अपने फ़ैसले पर अडिग हैं. उन्होंने कहा, “मैंने जो शुरू किया है, उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा.”

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शुरू किया है. यह संगठन भारत में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहा है.

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में आंदोलनकारियों की तत्काल मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें. उनका कहना है कि मई की शुरुआत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए.

हालांकि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा देने से इनकार करते हुए सीजेपी और उसके समर्थकों को “विघटनकारी तत्वों की बी-टीम” बताया है और कहा है कि उन्हें देश की तरक्की पर भरोसा नहीं है.

लद्दाख के इंजीनियर, शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 29 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.

खुद को महात्मा गांधी का अनुयायी बताते हुए वांगचुक कहते हैं कि वे गांधी के अहिंसक आंदोलन के सिद्धांतों में विश्वास करते हैं और उसी तरह भूख हड़ताल के ज़रिए सरकार की अंतरात्मा को जगाना चाहते हैं.

कौन हैं सोनम वांगचुक

59 साल के सोनम वांगचुक दो हफ्ते से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठे हैं

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 59 साल के सोनम वांगचुक दो हफ्ते से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठे हैं

‘सोनम सर’ के नाम से लोकप्रिय वांगचुक लद्दाख की सबसे सम्मानित सार्वजनिक शख्सियतों में गिने जाते हैं. उनका काम भारत ही नहीं, दुनिया भर में सराहा गया है.

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले वांगचुक ने लद्दाख को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद करने वाले कई समाधान विकसित किए हैं.

वे ‘आइस स्तूप’ विकसित करने के लिए सबसे अधिक जाने जाते हैं. यह बौद्ध स्तूपों से प्रेरित शंकु के आकार का कृत्रिम हिम स्तूप है, जो सर्दियों में पानी जमा करता है और वसंत के अंत में किसानों को पानी उपलब्ध कराता है, जब उसकी सबसे अधिक ज़रूरत होती है.

सोनम वांगचुक को उनके कामों के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें 2018 का रेमन मैग्सेसे पुरस्कार भी शामिल है, जिसे एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है.

वे 2009 की सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ के प्रमुख किरदार की प्रेरणा भी रहे हैं. 2017 में वे अमिताभ बच्चन द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में विशेष अतिथि के रूप में भी शामिल हुए थे.

पिछले साल अक्तूबर में सरकार ने वांगचुक को यह आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया था कि उन्होंने लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों को भड़काया. वांगचुक ने इन आरोपों से इनकार किया. करीब 170 दिन जेल में रहने के बाद सरकार ने उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप वापस ले लिए और उन्हें रिहा कर दिया.

फ़ैसले पर डटे वांगचुक

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके का कहना है कि वे वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित हैं

इमेज स्रोत, Geeta Pande/BBC

इमेज कैप्शन, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके का कहना है कि वे वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित हैं

दिल्ली में भीषण गर्मी और उमस के बावजूद सैकड़ों लोग दिन-रात जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक और सीजेपी के समर्थन में एकजुटता जता रहे हैं.

अभिजीत दीपके ने बीबीसी से कहा, “आज उनके अनशन का 16वां दिन है. उनका ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों गिर चुके हैं. जब भी वे बैठने या खड़े होने की कोशिश करते हैं, उन्हें तेज चक्कर आते हैं.”

उन्होंने कहा, “यहां तक कि वॉशरूम तक पैदल जाना भी उनके लिए मुश्किल हो गया है. उन्हें काफी तकलीफ हो रही है. जब भी मैं उनसे अनशन खत्म करने के लिए कहता हूं, वे मुझे डांटते हैं और कहते हैं, ‘तुम मेरी चिंता मत करो.'”

दीपके के अनुसार, डॉक्टरों ने भी वांगचुक को सलाह दी है कि अब उनके लिए अनशन जारी रखना उचित नहीं है, क्योंकि उनकी सेहत को लेकर गंभीर ख़तरा है. उन्होंने बताया कि उन्हें रोज़ हज़ारों संदेश मिल रहे हैं, जिनमें लोग उनसे वांगचुक को अनशन समाप्त करने के लिए मनाने की अपील कर रहे हैं.

“लेकिन वांगचुक अब भी अपने फ़ैसले पर डटे हुए हैं. दीपके के अनुसार, उन्होंने कहा है कि जब तक सरकार शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं करती, वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे.”

वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता

वांगचुक की सेहत की लगातार निगरानी की जा रही है

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, जंतर-मंतर पर मौजूद कई लोग भी अब उनसे अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं

जंतर-मंतर पर मौजूद कई लोग भी अब उनसे अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर बेहद चिंतित हैं.

हैदराबाद के 29 वर्षीय इंजीनियर अनिमेष साहू ने कहा, “मैं उनके वीडियो देखकर बड़ा हुआ हूं. उनसे मेरा भावनात्मक जुड़ाव है. उनकी सेहत को लेकर बहुत चिंता हो रही है. सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए.”

किसान सत्यप्रकाश भारद्वाज ने वांगचुक को “हीरा” बताते हुए कहा, “वे नई पीढ़ी के लिए अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार हैं. मैं प्रार्थना करता हूं कि वे अनशन समाप्त करें. वे तभी हमारे बच्चों के लिए लड़ पाएंगे, जब स्वस्थ रहेंगे.”

शिक्षाविद प्रोफेसर नंदिता नारायण ने कहा, “यह बेहद दुखद है कि सार्वजनिक जीवन में इतना बड़ा योगदान देने वाले व्यक्ति को सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए भूख हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है.”

उन्होंने भी वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा, “उनकी जान ख़तरे में है. यह लड़ाई लंबी चलेगी. आंदोलन को भी लंबे समय तक जारी रखना होगा. इसलिए ज़रूरी है कि वे जीवित रहें और इस संघर्ष का नेतृत्व करते रहें.”

संसद मार्च का एलान

वांगचुक के अनशन शुरू होने के बाद से कई राजनीतिक दलों के सांसद, सामाजिक कार्यकर्ता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर उनसे मिलने जंतर-मंतर पहुंचे हैं.

हालांकि अभिजीत दीपके का कहना है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का अब तक कोई नेता वहां नहीं आया है और न ही सरकार की ओर से बातचीत की कोई पहल की गई है.

उन्होंने कहा, “समझ नहीं आता कि सरकार देश के नागरिकों की बात को इतनी आसानी से क्यों ख़ारिज कर रही है. हम सिर्फ़ जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. हम यह नहीं कह रहे कि हमें या सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बना दिया जाए. हमारी केवल इतनी मांग है कि जवाबदेही तय की जाए और जो शिक्षा मंत्री परीक्षाएं ठीक से नहीं करा सका, उनकी जिम्मेदारी तय की जाए.”

अब अगर सरकार प्रदर्शनकारियों के पास नहीं आती है तो प्रदर्शनकारियों ने एलान किया है कि वे सरकार के पास जाएंगे. आंदोलनकारियों ने 20 जुलाई को संसद मार्च का एलान किया है. इसी दिन संसद का अगला सत्र शुरू होगा.

दीपके ने कहा, “हम पिछले 24 दिनों से यहां बैठे हैं और सोनम सर पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. इसके बावजूद सरकार ने न तो कोई हस्तक्षेप किया और न ही बातचीत शुरू की. इसलिए हमने तय किया है कि अब हम ही संसद जाकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखेंगे.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

Source link
#सनम #वगचक #क #वजन #कल #घट #ककरच #जनत #परट #अब #कय #करन #ज #रह #ह

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *