स्वर में बसा एक शताब्दी का जीवन, हमेशा याद आएंगे पंडित अमियो रंजन बंद्योपाध्याय – Pandit Amiya Ranjan Bandyopadhyay Indian Singer And Music Career And Life Journey

स्वर में बसा एक शताब्दी का जीवन, हमेशा याद आएंगे पंडित अमियो रंजन बंद्योपाध्याय – Pandit Amiya Ranjan Bandyopadhyay Indian Singer And Music Career And Life Journey

जन्म का होना ही मृत्यु का निमंत्रण है, यह शाश्वत सत्य पंडित अमियो रंजन बंद्योपाध्याय ने बहुत पहले अपने अंतस में आत्मसात कर लिया था। शायद इसी गहरी स्वीकृति के कारण इस वर्ष फरवरी में अपना सौवां जन्मदिन उन्होंने किसी औपचारिक समारोह से नहीं, बल्कि एक जीवंत संगीत संध्या के रूप में मनाया।


कोलकाता के रामकृष्ण मिशन संस्कृति संस्थान के विवेकानंद सभागार में धोती-कुर्ता पहने वह शतायु साधक मंच पर आए। एकताल में राग बिहाग के विलंबित ख्याल से गायन आरंभ हुआ। स्वर संयमित थे, पर उनमें सौ वर्षों की साधना का तेज चमक रहा था। द्रुत तीनताल की प्रस्तुति में भी वही सहज अधिकार झलकता रहा। बिना किसी प्रदर्शन या दोहराव के उन्होंने राग के विविध रंग ऐसे खोले कि श्रोता देर तक मंत्रमुग्ध बैठे रहे। 

कभी जड़ता के पक्षधर नहीं रहे 


परंपरा के दृढ़ समर्थक होते हुए भी वे कभी जड़ता के पक्षधर नहीं रहे। उनका विश्वास था कि परंपरा तभी जीवित रहती है जब उसमें सीखने और बदलते समय से संवाद करने का साहस हो। पचासी वर्ष की आयु में उन्होंने व्यवस्थित रूप से हिंदी सीखी और नब्बे वर्ष की अवस्था में कंप्यूटर का प्रशिक्षण लिया। यह उनकी जिज्ञासा और जीवटता का अद्भुत उदाहरण है। 

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